अमेरिकी बाजारों में हालिया उतार-चढ़ाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। हालांकि यह गिरावट फिलहाल एक सामान्य करेक्शन जैसी दिखती है। जियोपॉलिटिकल तनावों से डर जरूर बना है, लेकिन लंबे और बड़े युद्ध की संभावना कम मानी जा रही है, खासकर अमेरिका के बढ़ते कर्ज को देखते हुए।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि बाजार में यह डर अस्थायी वोलेटिलिटी पैदा कर रहा है। जहाँ सेंसेक्स और निफ्टी ने अंत में खुद को संभाल लिया, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में गिरावट ज्यादा बनी रही। इसकी वजह यह है कि इन सेगमेंट्स में कैश पोजिशन ज्यादा कट चुकी है और दोबारा खरीदारी के लिए निवेशकों को नया पैसा लगाना पड़ेगा। मिडकैप में रिवर्सल का संकेत तभी मजबूत माना जाएगा जब कुछ दिनों तक लो के नीचे क्लोजिंग न हो।
शोमेश कुमार की राय है कि अर्निंग्स ग्रोथ का ठहराव भारतीय बाजार की मौजूदा कमजोरी की असली वजह जियोपॉलिटिक्स नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट अर्निंग्स ग्रोथ का ठहराव है। कोविड के बाद आई तेज रिकवरी अब पीक पर पहुंच चुकी है। जब अर्निंग्स ग्रोथ धीमी होती है, तो वैल्यूएशन भी नॉर्मलाइज होते हैं। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, न कि किसी बड़े संकट का संकेत।
(शेयर मंथन, 23 जनवरी 2026)
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