अडानी ग्रुप पर किन खबरों का असर, शेयरों में तेज गिरावट से बाजार दबाव में

शेयर बाजार पर अडानी ग्रुप से जुड़ी खबरों का साफ असर देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई रिपोर्ट्स के बाद अडानी ग्रुप के लगभग सभी शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। कहीं 5% तो कहीं 15% तक।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि सबसे बड़ा हैवीवेट अडानी एंटरप्राइजेज भी इससे अछूता नहीं रहा। खबर यह थी कि अमेरिका की मार्केट रेगुलेटर SEC, अडानी समूह से जुड़े मामले में गौतम अडानी को समन भेजना चाहती है। अब तक डिप्लोमैटिक चैनल से समन सर्व नहीं हो पाने के बाद, कोर्ट से यह अनुमति मांगी जा रही है कि क्या ईमेल के जरिए समन भेजा जा सकता है। इस खबर ने निवेशकों में घबराहट बढ़ा दी और इंडेक्स पर भी दबाव बनाया। 

किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था में कुछ चुनिंदा कॉरपोरेट्स उसकी रीढ़ होते हैं। जैसे अमेरिका में Apple, Microsoft, Google या Nvidia हैं, वैसे ही भारत में अडानी, अंबानी और टाटा जैसे बड़े समूह हैं। ऐसे बड़े कॉरपोरेट्स हमेशा पॉलिटिकल और रेगुलेटरी रिस्क के दायरे में रहते हैं। जब तक किसी कंपनी में कोई गंभीर और वास्तविक गड़बड़ी न हो, तब तक कोई भी सरकार ऐसे समूहों को पूरी तरह कमजोर नहीं होने देती, क्योंकि उनका योगदान इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और समग्र अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम होता है।

अडानी ग्रुप के संदर्भ में भी यही तर्क दिया जा रहा है कि मौजूदा गिरावट ज्यादा तर राजनीतिक और रेगुलेटरी अनिश्चितता से जुड़ी है। इतिहास गवाह है कि राजनीति में चेहरे बदलते रहते हैं, लेकिन बड़े कॉरपोरेट्स लंबे समय तक देश की सेवा करते हैं। हालांकि, यह भी सच है कि इस तरह की खबरें अल्पकाल में भारी वोलैटिलिटी पैदा करती हैं और निवेशकों की भावनाओं को झकझोर देती हैं।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो अडानी ग्रुप के कई शेयरों में स्ट्रक्चर कमजोर हो चुका है। हालिया गिरावट के साथ कुछ शेयरों में एक्सट्रीम लोअर लो और लोअर हाई का पैटर्न साफ दिख रहा है, खासकर वीकली चार्ट पर। वॉल्यूम बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन कैंडल्स बड़ी बन रही हैं, जो यह संकेत देता है कि बाजार अभी सप्लाई को ठीक से एब्जॉर्ब नहीं कर पा रहा है। जब तक इस खबर पर पूरी तरह से स्पष्टता नहीं आती, तब तक डर बना रह सकता है।

ट्रेडिंग के नजरिए से इसमें शॉर्ट कवरिंग के मौके जरूर बन सकते हैं और बीच-बीच में तेज रिवर्सल भी देखने को मिल सकता है। लेकिन विशेषज्ञों की सलाह है कि इतनी ज्यादा वोलैटिलिटी में कैश मार्केट में ट्रेड करना जोखिम भरा हो सकता है। न खरीदने वाले सुरक्षित हैं, न बेचने वाले। जिन लोगों को ऑप्शंस की अच्छी समझ है, वे वोलैटिलिटी आधारित रणनीतियों पर काम कर सकते हैं, लेकिन आम निवेशकों के लिए फिलहाल दूरी बनाए रखना ज्यादा समझदारी भरा कदम माना जा रहा है।

अडानी ग्रुप के शेयर इस समय निवेश से ज्यादा ट्रेडिंग की कैटेगरी में आते हैं। जब तक ट्रेंड स्पष्ट रूप से पॉजिटिव नहीं हो जाता और रेगुलेटरी मोर्चे पर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक बाजार को “देखो और इंतजार करो” की रणनीति के साथ ही संभालना बेहतर होगा।


(शेयर मंथन, 26 जनवरी 2026)

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