आईटी सेक्टर में जारी गिरावट, ऐसे में टीसीएस शेयरों में फंसे निवेशकों को क्या करना चाहिए?

आईटी सेक्टर में जारी कमजोरी के बीच टीसीएस जैसे दिग्गज शेयरों को लेकर निवेशकों के मन में असमंजस बना हुआ है। आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि जिन निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर खरीदारी की थी, वे आज 20-25% तक के नुकसान में हैं और यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या इस स्तर पर निकल जाना बेहतर होगा या धैर्य के साथ बने रहना चाहिए। मौजूदा स्थिति को समझने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेंड को पहचानना, और फिलहाल आईटी सेक्टर का ट्रेंड साफ तौर पर डाउनट्रेंड में बना हुआ है। जब तक यह ट्रेंड नहीं बदलता और लोअर हाई का पैटर्न खत्म नहीं होता, तब तक किसी मजबूत रिवर्सल की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।

आईटी इंडेक्स के स्तरों को देखें तो इसमें 28,500, 26,000 और 24,500 जैसे संभावित रिट्रेसमेंट जोन सामने आते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार निश्चित रूप से इन स्तरों तक जाएगा, बल्कि यह संभावित सपोर्ट एरिया हैं जहां से बाजार पलट भी सकता है। TCS के संदर्भ में बात करें तो यह शेयर पहले ही काफी ज्यादा करेक्शन झेल चुका है और टेक्निकली ओवरसोल्ड स्थिति में है, जिससे शॉर्ट टर्म में बाउंस की संभावना बन सकती है। हालांकि, यह बाउंस टिकाऊ होगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है क्योंकि बड़े ट्रेंड में कमजोरी बनी हुई है।

इस गिरावट की एक बड़ी वजह आईटी सेक्टर में रेवेन्यू विजिबिलिटी को लेकर अनिश्चितता है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कमाई को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों में आईटी कंपनियों ने काफी तेज रैली दिखाई थी। उदाहरण के तौर पर टीसीएस लगभग 1500 से 4500 रुपये तक पहुँचा, यानी तीन गुना बढ़ा। ऐसे में अब करेक्शन भी उसी अनुपात में गहरा दिख रहा है।

वैल्यूएशन के लिहाज से भी यह माना जा रहा है कि आईटी कंपनियां अब अपने सामान्य स्तर यानी लगभग 15 के पी/ई मल्टीपल के आसपास स्थिर होने की कोशिश कर रही हैं। जब तक ग्रोथ में तेज सुधार नहीं दिखता, तब तक ऊंचे वैल्यूएशन को बनाए रखना मुश्किल है। इसलिए यह गिरावट केवल टेक्निकल नहीं, बल्कि फंडामेंटल एडजस्टमेंट भी है। निवेश रणनीति की बात करें तो ऐसे समय में घबराकर निर्णय लेने से बचना चाहिए। अगर निवेश लंबी अवधि (2से 3 साल) के नजरिए से किया गया है, तो धैर्य बनाए रखना ज्यादा समझदारी हो सकती है। हालांकि, शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग या लेवरेज पोजीशन में जोखिम अधिक है। कुल मिलाकर, आईटी सेक्टर में अभी “सेल ऑन राइज” का ट्रेंड बना हुआ है, लेकिन ओवरसोल्ड स्थिति के कारण बीच-बीच में राहत भरी तेजी (बाउंस) भी देखने को मिल सकती है।

 



(शेयर मंथन, 21 मार्च 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)