फरवरी में निवेश का बदला रुझान : सिप घटा, लेकिन इक्विटी फंडों में शुद्ध निवेश बढ़ा

एम्फी के ताजा आँकड़ों के अनुसार, फरवरी महीने में जहाँ एक ओर सिप से निवेश में कुछ कमी आयी, वहीं दूसरी ओर इक्विटी म्यूचुअल फंडों में निवेश में वृद्धि दर्ज की गयी।

फरवरी में सिप निवेश 29,845 करोड़ रुपये

म्यूचुअल फंड उद्योग के फरवरी महीने के आँकड़े बता रहे हैं कि निवेशकों के रुझान में बदलाव आ रहा है। इन आँकड़ों के अनुसार, सुव्यवस्थित निवेश योजना यानी सिप (SIP) के जरिये निवेश में मासिक आधार पर कमी दर्ज की गयी, जबकि इक्विटी म्यूचुअल फंडों में कुल निवेश प्रवाह बढ़ गया। उद्योग संगठन एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के अनुसार फरवरी में सिप के जरिये 29,845 करोड़ रुपये का निवेश आया। यह जनवरी के 31,002 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 4% कम है।

पिछले 2 महीनों से सिप निवेश 30,000 करोड़ रुपये से ऊपर बना हुआ था, लेकिन फरवरी में यह स्तर टूट गया। हालाँकि सालाना आधार पर सिप का प्रवाह अब भी मजबूत बना हुआ है। फरवरी 2025 में सिप के जरिये 25,999 करोड़ रुपये का निवेश आया था। इस तरह सालाना आधार पर सिप निवेश में लगभग 15% की वृद्धि दर्ज की गयी।

इक्विटी म्यूचुअल फंडों में फरवरी के दौरान कुल प्रवाह बढ़ कर 25,977 करोड़ रुपये हो गया। जनवरी में यह आँकड़ा 24,028 करोड़ रुपये था, यानी मासिक आधार पर लगभग 8% की वृद्धि दर्ज की गयी। हालाँकि सालाना तुलना में इसमें कमी दिखाई देती है। फरवरी 2025 में इक्विटी फंडों में 29,303 करोड़ रुपये का निवेश आया था, जिससे तुलना करने पर इस वर्ष फरवरी का प्रवाह लगभग 11% कम है।

फ्लेक्सीकैप फंड सबसे आगे, 6,924 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश 

इक्विटी फंडों की उपश्रेणियों में फ्लेक्सीकैप फंड सबसे आगे रहे। फरवरी में इस श्रेणी में 6,924 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। हालाँकि जनवरी के 7,672 करोड़ रुपये की तुलना में इसमें लगभग 10% की कमी आयी। मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों में निवेशकों की दिलचस्पी मजबूत बनी रही। फरवरी में मिडकैप फंडों में 4,002 करोड़ रुपये और स्मॉलकैप फंडों में 3,881 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। मासिक आधार पर मिडकैप फंडों में 26% और स्मॉलकैप फंडों में 32% की वृद्धि दर्ज की गयी। लार्जकैप फंडों में भी प्रवाह बढ़ा और इसमें लगभग 5% की वृद्धि देखी गयी।

सेक्टोरल और थीमैटिक फंडों में निवेश में तेज उछाल दर्ज किया गया। इस श्रेणी में प्रवाह 187% बढ़ कर 2,987 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। इसके विपरीत कुछ श्रेणियों में निवेश में गिरावट देखी गयी। डिविडेंड यील्ड फंडों में मासिक आधार पर 56% की गिरावट आयी, जबकि फोकस्ड फंडों में प्रवाह 42% घट गया। वैल्यू और कॉन्ट्रा फंडों में भी निवेश कम हुआ और इस श्रेणी में प्रवाह 27% घट कर 727 करोड़ रुपये रह गया।

डेट फंडों में निवेश जनवरी 2026 से कम

डेट फंडों में फरवरी के दौरान निवेश सकारात्मक रहा। हालाँकि इसमें भी मासिक आधार पर कमी आयी। फरवरी में डेट योजनाओं में कुल 42,106 करोड़ रुपये का प्रवाह आया, जो जनवरी के 74,827 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 44% कम है। डेट फंडों की 16 उपश्रेणियों में लिक्विड फंड सबसे आगे रहे। फरवरी में इस श्रेणी में 59,077 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि मनी मार्केट फंडों में 6,266 करोड़ रुपये का प्रवाह दर्ज किया गया। हालाँकि कुछ श्रेणियों में निकासी भी देखी गयी। ओवरनाइट फंडों में 14,006 करोड़ रुपये की निकासी हुई, जबकि अल्ट्रा शॉर्ट अवधि फंडों से 4,373 करोड़ रुपये निकले।

हाइब्रिड योजनाओं में भी निवेश घटा है। फरवरी में इस श्रेणी में कुल प्रवाह 11,983 करोड़ रुपये रहा, जो जनवरी के 17,356 करोड़ रुपये से लगभग 31% कम है। हाइब्रिड योजनाओं की 8 उपश्रेणियों में मल्टी एसेट एलोकेशन फंडों में सबसे अधिक 8,476 करोड़ रुपये का निवेश आया। इसके बाद बैलेंस्ड एडवांटेज और डायनेमिक एसेट एलोकेशन फंडों में 1,521 करोड़ रुपये का प्रवाह दर्ज किया गया। कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंडों में लगातार चौथे महीने निकासी हुई और फरवरी में इससे 67.87 करोड़ रुपये निकले।

अन्य योजनाओं की श्रेणी में पिछले महीने कुल 13,879 करोड़ रुपये का प्रवाह आया, जबकि जनवरी में यह 39,954 करोड़ रुपये था। यानी मासिक आधार पर लगभग 65% की गिरावट दर्ज की गयी। इस श्रेणी में गोल्ड ईटीएफ में 5,254 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो जनवरी के 24,039 करोड़ रुपये की तुलना में काफी कम है। सिल्वर ईटीएफ में फरवरी के दौरान 826 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गयी। वहीं इंडेक्स फंडों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली और इन योजनाओं में निवेश जनवरी के 27 करोड़ रुपये से बढ़ कर फरवरी में 3,233 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। (शेयर मंथन, 10 मार्च 2026)