क्या शीला फोम का खराब दौर खत्म हो रहा है या यह सिर्फ अस्थायी राहत है?

एक निवेशक जानना चाहते हैं कि उन्हें शीला फोम (Sheela Foam) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

 बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि किसी भी कंपनी के रिजल्ट को देखने का हर एनालिस्ट का अपना तरीका होता है। कोई सेल्स के आधार पर देखता है, कोई एंटरप्राइज वैल्यू पर, तो कोई ऑपरेटिंग प्रॉफिट और मार्जिन पर फोकस करता है। यहां सबसे अहम बात यह होती है कि कंपनी जिस इंडस्ट्री या सेक्टर में काम कर रही है, वह सेक्टर निवेश के लिहाज से भरोसेमंद है या नहीं। अगर सेक्टर में लंबे समय के लिए ग्रोथ की गुंजाइश है और उसमें कोई बड़ा स्ट्रक्चरल रिस्क नहीं दिखता, तो ऐसी कंपनियों को थोड़ी लिबर्टी देकर उनके उतार–चढ़ाव को समझा जा सकता है।

शीला फोम के मामले में सेल्स और मार्जिन लेवल पर कोई बड़ी कमजोरी नहीं दिख रही थी। जो भी दिक्कतें नजर आ रही थीं, वे ज्यादातर मर्जर से जुड़ी तकनीकी वजहों से थीं, न कि बिजनेस मॉडल की कमजोरी के कारण। किसी कंपनी को तब ही वाकई कमजोर कहा जा सकता है जब वह अच्छे बाजार हालात में भी खराब प्रदर्शन करे। पिछले डेढ़ साल से पूरे मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में हालात मुश्किल रहे हैं। डिमांड और प्राइसिंग दोनों पर दबाव था, जिसका असर कई कंपनियों की बिक्री और मुनाफे पर पड़ा। ऐसे माहौल में शीला फोम से बस एक ही चीज का इंतजार था कि कब इसका प्रॉफिट टर्नअराउंड दिखे।

लेटेस्ट रिजल्ट में कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी में तेज सुधार देखने को मिला है, जिससे यह संकेत मिलता है कि दबाव का दौर शायद पीछे छूट रहा है। कच्चे माल की कीमतों में उतार–चढ़ाव और प्राइस हार्डनिंग जैसे फैक्टर पहले कंपनी पर बोझ बने हुए थे, लेकिन अब मार्जिन में सुधार के संकेत दिख रहे हैं। मैनेजमेंट की कमेंट्री और एनालिस्ट कॉल के दौरान दिखाई देने वाला आत्मविश्वास भी यह बताता है कि कंपनी को अपने बिजनेस पर भरोसा है और वह मौजूदा चुनौतियों से निकलने की रणनीति पर काम कर रही है। हालाँकि, इसका यह मतलब नहीं है कि कंपनी पूरी तरह से मुश्किलों से बाहर निकल चुकी है।

एक तिमाही का अच्छा रिजल्ट पूरी कहानी नहीं बदल देता। किसी भी कंपनी में स्थायी सुधार पर भरोसा करने के लिए कम से कम दो से तीन क्वार्टर तक लगातार बेहतर परफॉर्मेंस देखना जरूरी होता है। हो सकता है कि इस दौरान शेयर की कीमत काफी ऊपर चली जाए, लेकिन निवेश के फैसले सिर्फ प्राइस मूवमेंट देखकर नहीं, बल्कि बिजनेस की मजबूती देखकर लेने चाहिए। शीला फोम जिस सेगमेंट में काम करती है, उसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों में आगे विस्तार की अच्छी संभावनाएं हैं। भले ही नए प्लेयर्स बाजार में आएं, फिर भी डिमांड बढ़ने से ग्रोथ की गुंजाइश बनी रहती है।

आखिर में सबसे बड़ा फैक्टर मैनेजमेंट का फोकस और निष्पादन क्षमता होती है। अगर मैनेजमेंट अपनी रणनीति पर टिके रहते हुए लगातार बॉटम लाइन सुधारता रहा, तो कंपनी के लिए लंबी अवधि में स्थिति काफी बेहतर हो सकती है। फिलहाल इस स्टॉक को लेकर जल्दबाजी में कोई अंतिम राय बनाने की बजाय आने वाले कुछ क्वार्टर के नतीजों पर नजर रखना ज्यादा समझदारी भरा कदम होगा।


(शेयर मंथन, 09 फरवरी 2026)

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