शेयर बाजार में हम अक्सर स्पेकुलेशन की बात करते हैं, लेकिन मौजूदा समय में उससे भी बड़ा स्पेकुलेशन चाँदी और सोने में दिख रहा है। बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते है कि सोने और चाँदी की कीमतों में आगे क्या होगा?
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि हालिया तेज उछाल ने लोगों में लालच बढ़ाया, जहाँ निवेशक ऊंचे स्तरों पर औसत लागत बढ़ाते चले गए। कीमतें बढ़ते समय “नॉशनल प्रॉफिट” दिखता रहा, लेकिन जैसे ही तेज करेक्शन आया, वही निवेशक भारी नुकसान में फंसते नजर आये। असली दिक्कत यह है कि ज्यादातर लोग प्रॉफिट बुक नहीं करते और गिरावट में एवरेज बढ़ाते रहते हैं, जिससे रिस्क कई गुना बढ़ जाता है। चाँदी के चार्ट में जो तेज़ मूवमेंट दिखा, वह क्लासिक फोमो (FOMO) का उदाहरण है। ऊपरी स्तरों से करेक्शन आने पर दर्द और बढ़ता है, क्योंकि मार्जिन ट्रेडिंग और लीवरेज के कारण छोटे करेक्शन भी बड़े नुकसान में बदल जाते हैं। अगर चांदी डॉलर में 70-75 के आसपास आती है, तो वहां से धीरे-धीरे एक्यूमुलेशन का मौका बन सकता है, बशर्ते औसत लागत 60 के नीचे रखी जाये और निवेश का नजरिया कम से कम 5 साल का हो। बहुत ऊंचे स्तरों पर कूदना स्पेकुलेशन है, निवेश नहीं।
सोने में भी उतार-चढ़ाव कम नहीं रहा। हाल के झटकों ने “सेफ हेवन” वाली धारणा पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि जियोपॉलिटिकल तनाव और सेंट्रल बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी लंबी अवधि में सपोर्ट देती है, फिर भी शॉर्ट टर्म में 10-20% तक का रिस्क बना रह सकता है। डॉलर में सोने के लिए 4500 से 4000 के बीच का दायरा धीरे-धीरे एक्यूमुलेशन जोन माना जा सकता है, जबकि पूरी तरह से सेफ ज़ोन 4000 के नीचे माना जाएगा—जो मिल भी सकता है या नहीं भी।
एक अहम संकेत यह भी है कि पहली बार ग्लोबल सेंट्रल बैंकों का गोल्ड रिजर्व, उनके यूएस ट्रेजरी होल्डिंग्स से ज्यादा हो गया है। यह डीडॉलराइजेशन की ओर इशारा करता है और आने वाले समय में जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने की संभावना को भी दर्शाता है। ऐसे माहौल में सोना-चांदी में लंबी अवधि का आकर्षण बना रह सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में तेज़ करेक्शन का जोखिम भी उतना ही बड़ा है।
निवेशकों के लिए सबसे व्यावहारिक रास्ता एसेट एलोकेशन है। सोना और चांदी मिलाकर कुल पोर्टफोलियो का 5-10% रखना समझदारी है। घर में पड़ा सोना-चांदी भी एसेट ही है, उसे नजरअंदाज करके अलग से बहुत बड़ा एक्सपोजर लेना सही नहीं। इक्विटी, रियल एस्टेट और प्रेशस मेटल्स, तीनों में संतुलन बनाकर चलना ही लॉन्ग टर्म में पूंजी की सुरक्षा और ग्रोथ देता है।
मौजूदा दौर में चांदी और सोना दोनों में भारी उतार-चढ़ाव रहेगा। ऊँचे स्तरों पर भागना नुकसानदेह हो सकता है, जबकि करेक्शन में अनुशासित तरीके से, सीमित एलोकेशन के साथ निवेश करना समझदारी है। शॉर्ट टर्म में बाजार चाहे जो करे, लंबी अवधि में डिसिप्लिन और एसेट एलोकेशन ही असली सुरक्षा कवच है।
(शेयर मंथन, 02 फरवरी 2026)
(आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)