जेपी इन्फ्राटेक मामले में उच्चतम न्यायालय ने खरीदारों को राहत देते हुए इसकी होल्डिंग कंपनी जेपी एसोसिएट्स (JP Associates) को 2,000 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया है।
इसके लिए उच्चतम न्यायालय ने इसे 27 अक्टूबर तक का समय दिया है। इसके अलावा न्यायालय ने इन्सॉल्वेन्सी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) को जेपी इन्फ्राटेक का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के लिए कहा है। साथ ही उच्चतम न्यायालय ने एनसीडीआरसी और उपभोक्ता न्यायालयों आदि में चल रहे सभी मामलों में स्टे ऑर्डर दे दिया है, हालाँकि इसने कॉरपोरेट इन्सॉल्वेन्सी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया पर रोक नहीं लगायी है।
शीर्ष न्यायालय ने आईआरपी से कहा है कि वह 45 दिनों के भीतर मामले में समाधान योजना प्रस्तुत करें। इस योजना में यह बताना होगा कि खरीदारों के फ्लैटों का निर्माण कैसे पूरा होगा और देरी की वजह से खरीदारों को दिये जाने वाले मुआवजे का इंतजाम प्रवर्तक कैसे करेंगे। उच्चतम न्यायालय ने जेपी इन्फ्राटेक और जेपी एसोसिएट्स के निदेशकों को उसकी अनुमति लिए बिना विदेश जाने से मना कर दिया है। साथ ही जेपी इन्फ्राटेक और जेपी एसोसिएट्स को किसी भी संपत्ति को बेचने से पहले आईआरपी से इजाजत लेने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी।
इस खबर का असर जेपी इन्फ्राटेक के शेयर पर भी पड़ा और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE)पर इसका निचला सर्किट छूने के बाद बंद हुआ। बीएसई पर यह शेयर 5% की गिरावट के साथ 16 रुपये पर रहा। दूसरी ओर जेपी एसोसिएट्स का शेयर बीएसई पर 6.42% की कमजोरी के साथ 21.85 रुपये पर बंद हुआ, हालाँकि इससे पहले यह नीचे की ओर फिसल कर 21.05 रुपये तक चला गया था। (शेयर मंथन, 11 सितंबर 2017)