SEBI चेयरमैन का साफ संदेश - एफ एंड ओ (F&O) पर फिलहाल कोई नई सख्ती नहीं

बाजार नियामक सेबी (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 4 फरवरी को कहा कि इक्विटी डेरिवेटिव्स के नियमन को लेकर सेबी फिलहाल किसी तात्कालिक सख्ती के मूड में नहीं है।

चेयरमैन ने आगे कहा कि इस दिशा में एक संतुलित व चरणबद्ध (मेथडिकल) अप्रोच अपनाई जा रही है। बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए इक्विटी डेरिवेटिव्स पर ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने की घोषणा की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पांडे ने साफ किया कि फिलहाल न तो एफएंडओ (F&O) में कोई नया प्रतिबंध लगाया जा रहा है और न ही वीकली एक्सपायरी के नियमों में कोई बदलाव किया जाएगा। मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सेबी किसी नए कदम पर विचार नहीं कर रहा है और जो ढांचा पहले से लागू है, वही जारी रहेगा।

यूनियन बजट 2026–27 के तहत सरकार ने फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर एसटीटी 0.02% से बढ़ाकर 0.05% करने का प्रस्ताव रखा है। वहीं, ऑप्शंस प्रीमियम पर एसटीटी 0.1% से बढ़ाकर 0.15% और ऑप्शंस के एक्सरसाइज पर एसटीटी 0.125% से बढ़ाकर 0.15% करने का प्रस्ताव है। अन्य एसेट क्लासेस पर एसटीटी की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार का कहना है कि भारत में ऑप्शंस और फ्यूचर्स ट्रेडिंग का कुल वॉल्यूम देश की जीडीपी से 500 गुना से ज्यादा हो चुका है, जिससे शुद्ध रूप से सट्टेबाजी को हतोत्साहित करने के लिए टैक्स दरों में बदलाव जरूरी हो गया है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने स्पष्ट किया कि एसटीटी बढ़ाने का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि घरेलू निवेशकों की बचत की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि मेहनत से कमाई गई बचत को ऐसे तरीकों में निवेश किया जाना चाहिए, जिससे घरों की संपत्ति बढ़े। सेबी कई बार यह चेतावनी दे चुका है कि एफएंडओ में रिटेल निवेशकों को बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ता है। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने भी कहा कि डेरिवेटिव्स बाजार में वॉल्यूम, अंतर्निहित सिक्योरिटीज बाजार और देश की जीडीपी के मुकाबले अत्यधिक सट्टेबाजी को दर्शाता है, जिससे रिटेल निवेशकों को भारी नुकसान होता है और सिस्टमेटिक रिस्क भी बढ़ता है।

कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को गहराने की जरूरत पर बोलते हुए तुहिन कांत पांडे ने चिंता जताई कि सेबी के एक सर्वे के मुताबिक ज्यादा निवेशक बॉन्ड मार्केट की तुलना में क्रिप्टोकरेंसी के बारे में ज्यादा जानते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में बॉन्ड मार्केट में अच्छी ग्रोथ हुई है, लेकिन इसे और गहराने के लिए जरूरी है कि केवल टॉप-रेटेड कंपनियों तक सीमित न रहकर ज्यादा संख्या में कंपनियां, खासकर फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर से बाहर की कंपनियां भी इस माध्यम से फंड जुटाएं। इसके साथ ही पब्लिक इश्यूज की संख्या बढ़ाने और विविध क्षेत्रों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। बीएसई के एमडी और सीईओ सुंदररामन राममूर्ति ने सुझाव दिया कि एक तय सीमा से अधिक फंड जुटाने के लिए कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में पब्लिक इश्यू को अनिवार्य किया जाए और इश्यूर्स को टैक्स छूट दी जाये।

(शेयर मंथन, 04 फरवरी 2026)