भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के लिए कई अहम नियामकीय और नीतिगत कदमों की घोषणा की। इनका मकसद ग्राहकों की सुरक्षा को मजबूत करना, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और बैंकों, एनबीएफसी (NBFCs) तथा शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए कारोबार की लागत को आसान बनाना है।
आरबीआई का कहना है कि इन फैसलों से आम ग्राहकों को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी, वहीं वित्तीय संस्थानों को नियमों के पालन में राहत और कामकाज में सहूलियत मिलेगी। आरबीआई ने बताया कि ये उपाय कई क्षेत्रों को कवर करते हैं, जिनमें ग्राहक संरक्षण, डिजिटल पेमेंट्स की सुरक्षा, एमएसएमई को कर्ज देने को बढ़ावा, एनबीएफसी के लिए नियामकीय राहत, शहरी सहकारी बैंकों को समर्थन और वित्तीय बाजारों को गहरा बनाने से जुड़े कदम शामिल हैं।
डिजिटल लेनदेन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी से बचाव पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि ग्राहकों का भरोसा मजबूत बना रहे और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन अधिक सुरक्षित हो सकें। एमएसएमई सेक्टर को लेकर आरबीआई ने संकेत दिया कि छोटे और मझोले कारोबारों तक कर्ज की पहुंच आसान बनाने के लिए नियमों में सुधार किए जाएंगे। इससे छोटे उद्योगों और व्यापारियों को सस्ता और समय पर फाइनेंस मिल सकेगा, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। वहीं एनबीएफसी के लिए कुछ नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल करने का उद्देश्य यह है कि वे कम लागत में ज्यादा कुशलता से काम कर सकें और अर्थव्यवस्था के उन हिस्सों तक फाइनेंस पहुंचा सकें, जहां बैंकों की पहुंच सीमित है।
शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए भी आरबीआई ने सपोर्टिव कदम उठाने की बात कही है, ताकि उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो और वे स्थानीय स्तर पर ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दे सकें। इसके अलावा, वित्तीय बाजारों को और गहरा करने के लिए भी कुछ सुधारों की घोषणा की गई है, जिससे निवेश के नए अवसर बनेंगे और बाजारों में तरलता बढ़ेगी। आरबीआई के ये फैसले वित्तीय सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित, समावेशी और कुशल बनाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं। इनसे जहां एक ओर ग्राहकों को बेहतर सुरक्षा और सुविधाएं मिलेंगी, वहीं दूसरी ओर बैंक, एनबीएफसी और सहकारी बैंक ज्यादा भरोसेमंद और कम लागत वाले माहौल में काम कर पाएंगे, जिसका फायदा अंततः पूरी अर्थव्यवस्था को होगा। (शेयर मंथन, 06 फरवरी 2026)