ईरान संकट और तेल की उबाल का असर, नये रिकॉर्ड स्तर तक फिसला रुपया

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नये निचले स्तर पर गिर गया। यह लगातार दूसरा दिन है, जब रुपये ने गिर कर नये निचले स्तर का रिकॉर्ड बनाया है।

अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में कारोबार समाप्त होने के बाद रुपया 5 पैसे गिर कर 92.30 पर बंद हुआ। इससे पहले रुपया 92.33 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान लगातार कमजोर होता गया। कारोबार के दौरान रुपया एक समय 92.4775 के स्तर तक गिरा, जो अब तक के इतिहास में डॉलर के मुकाबले रुपये का सबसे कमजोर स्तर है। इससे पहले गुरुवार को रुपया 24 पैसे गिर कर 92.25 प्रति डॉलर के अपने अब तक के सबसे निचले बंद स्तर पर आया था। अब आज 92.30 का नया निचला बंद स्तर भी बन गया।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों का मानना है कि वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता, मजबूत डॉलर और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा है। वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती भी रुपये की कमजोरी का एक बड़ा कारण बनी हुई है। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.04% बढ़ कर 99.77 पर कारोबार कर रहा था।

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल भी रुपये पर दबाव का एक बड़ा कारण बना है। वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 4.99% बढ़ कर 96.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया है। दिन के कारोबार में एक समय यह 100 डॉलर के पार निकला था। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गयी है, जिससे कीमतों में तेजी आयी है।

घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी का असर मुद्रा बाजार पर दिखायी दिया। बीएसई सेंसेक्स 1,470.50 अंक यानी 1.93% गिरकर 74,563.92 अंक पर आ गया, जबकि निफ्टी 488.05 अंक यानी 2.06% टूट कर 23,151.10 अंक पर बंद हुआ। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली भी जारी रही। एक्सचेंज के आँकड़ों के मुताबिक, 12 मार्च को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध रूप से 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। (शेयर मंथन, 13 मार्च 2026)