शेयर मंथन में खोजें

मुहूर्त कारोबार में बाजार में मजबूती, 245 अंक चढ़ा सेंसेक्स

दिवाली के शुभ अवसर पर मुहूर्त समय के दौरान हुए कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूती आयी।

साथ ही छोटे-मँझोले शेयर भी खूब खरीदे गये। वाहन, बैंक, खपत, आईटी और धातु शेयरों में सर्वाधिक मजबूती दर्ज की गयी। बाजार को सकारात्मक वैश्विक रुझानों से भी सहारा मिला।
बीएसई सेंसेक्स (BSE SENSEX) 34,991.91 अंकों के पिछले बंद स्तर के मुकाबले 35,301.88 पर खुल कर आखिर में सेंसेक्स 245.77 अंक या 0.70% की बढ़त के साथ 35,237.68 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई (NSE) का निफ्टी (Nifty) 10,530.00 के पिछले बंद स्तर की तुलना में 10,614.45 पर खुल कर 68.40 अंक या 0.65% की बढ़त के साथ 10,598.40 पर बंद हुआ। बीएसई के कुल शेयरों में से 1,941 शेयरों में मजबूती के मुकाबले 429 शेयरों में कमजोरी आयी, जबकि 127 शेयर सपाट रहे।
वहीं छोटे-मँझोले बाजारों में भी खरीदारी देखने को मिली। बीएसई मिडकैप (BSE Midcap) में 0.81% और बीएसई स्मॉलकैप (BSE SmallCap) में 1.19% की मजबूती आयी। वहीं निफ्टी मिडकैप 100 (Nifty Midcap 100) 0.78% और निफ्टी स्मॉल 100 (Nifty Small 100) 1.12% की बढ़ोतरी के साथ बंद हुए।
निफ्टी के प्रमुख 50 शेयरों में से 48 शेयरों में मजबूती और 02 शेयरों में कमजोरी आयी। बीएसई के 31 प्रमुख शेयरों में 30 शेयरों में मजबूती और 01 शेयर में कमजोरी आयी। मुहूर्त कारोबार में सेंसेक्स के दिग्गज शेयरों में से महिंद्रा ऐंड महिंद्रा में 1.97%, इन्फोसिस में 1.38%, टाटा मोटर्स में 1.17%, बजाज ऑटो में 1.16%, हीरो मोटोकॉर्प में 1.15% और वेदांत में 1.13% की बढ़त आयी। इकलौता कमजोर शेयर भारती एयरटेल 0.34% की कमजोरी के साथ बंद हुआ। (शेयर मंथन, 07 नवंबर 2018)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख