सोना और चाँदी में रिकॉर्ड तेजी, भू-राजनीतिक तनाव और टैरिफ का असर

कमोडिटी बाजार में इस समय जो तस्वीर सामने आ रही है, वह ऐतिहासिक कही जा सकती है। एक तरफ सोना लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और एमसीएक्स पर 1.5 लाख रुपये के पार निकल चुका है, वहीं दूसरी तरफ चाँदी ने भी निवेशकों को चौंका दिया है।

कमोडिटी बाजार विश्लेषक अनुज गुप्ता का कहना है कि हाल ही में चाँदी 3 लाख रुपये सके स्तर को छू चुकी थी और अब एक ही दिन में तेज उछाल के साथ 3.25 से 3.28 लाख रुपये सतक के भाव भी देखने को मिल गए। रोजाना 10 से 15 हजार रुपये की हलचल यह साफ संकेत दे रही है कि बाजार इस समय बेहद हाई वोलैटाइल फेज में है। इस जबरदस्त तेजी की सबसे बड़ी वजह लगातार बढ़ते जियोपॉलिटिकल कंसर्न्स और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता है। साल की शुरुआत से ही अमेरिका, यूरोप, चीन, भारत और रूस से जुड़े टैरिफ फैसले, युद्ध जैसे हालात और वैश्विक तनाव बाजार को लगातार झकझोर रहे हैं। अमेरिका द्वारा पहले चीन और भारत पर टैरिफ, फिर यूरोपियन देशों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणाओं ने हालात को और गंभीर बना दिया है। इन घटनाओं ने सेफ हेवन डिमांड को बढ़ाया है, जिसका सीधा फायदा सोने और चांदी को मिला है। 

चाँदी की चाल खास तौर पर इसलिए अलग नजर आ रही है क्योंकि यह सिर्फ एक सेफ हेवन एसेट नहीं है, बल्कि एक अहम इंडस्ट्रियल मेटल भी है। रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बढ़ती मांग ने इसकी कीमतों को और सपोर्ट दिया है। यही वजह है कि जहां गोल्ड में साल की शुरुआत से अब तक करीब 10% की बढ़त दिखी है, वहीं चाँदी लगभग 40% तक उछल चुकी है। इस असमान तेजी ने गोल्ड-सिल्वर रेशियो को भी तेजी से नीचे खिसकाया है, जो अब करीब 49 के आसपास आ गया है, जबकि पहले यह 100 तक पहुंच चुका था।

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इतनी बेहिसाब तेजी के बाद चाँदी फिर लंबे समय के लिए सुस्त पड़ सकती है, जैसा कि इतिहास में कई बार हुआ है। इस पर जानकारों का कहना है कि इस बार हालात पहले से अलग हैं। इंडस्ट्रियल डिमांड और सेफ हेवन दोनों तरफ से सपोर्ट मिलने की वजह से लॉन्ग टर्म ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव नजर आता है, हालांकि वोलैटिलिटी बहुत ज्यादा बनी रहेगी। कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव आम बात हो सकती है और करेक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। 

सोना और चाँदी दोनों ही इस समय रिकॉर्ड स्तरों पर हैं, लेकिन यह दौर उत्साह के साथ-साथ सावधानी का भी है। बजट, वैश्विक राजनीति और टैरिफ से जुड़े फैसले आगे भी बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए बेहतर यही होगा कि वे जल्दबाजी से बचें, जोखिम को समझें और किसी भी निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


(शेयर मंथन, 20 जनवरी 2026)

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