विकास दर 7.5% से ऊपर ले जाने के सरकार के दावे के उलट औद्योगिक उत्पादन (IIP) और खुदरा महँगाई या कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के ताजा आँकड़ों ने झटका दिया है।
सितंबर 2015 के महीने में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर घट कर 3.6% रही, जो पिछले महीने अगस्त में 6.2% थी। वहीं अक्टूबर महीने में खुदरा महँगाई दर 5% पर पहुँच गयी, जो पिछले महीने सितंबर में 4.41% थी। इस तरह महँगाई और औद्योगिक उत्पादन के मोर्चों पर सरकार के लिए फिर से चुनौती दिख रही है।
पहली छमाही में औद्योगिक उत्पादन
सितंबर में औद्योगिक उत्पादन बढ़ने की दर पिछले 4 महीनों के निचले स्तर पर आ गयी है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में आईआईपी वृद्धि की रफ्तार 4% रही है। इससे साफ है कि मौजूदा वित्त वर्ष में औद्योगिक उत्पान दो अंकों में नहीं पहुँच पायेगी, खास कर तब, जब मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की वृद्धि दर घट कर सितंबर में महज 2.6% रह गयी है, जो अगस्त महीने में 6.9% थी।
महँगाई ने सिर उठाया
हाल के महीनों में महँगाई दर निचले स्तरों पर रही है, मगर अक्टूबर का रुझान सतर्क करने वाला है। अक्टूबर में खास कर खुदरा खाद्य महँगाई (कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स) में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गयी। सितंबर में 3.88% के मुकाबले अक्टूबर में फूड प्राइस इंडेक्स की वृद्धि दर 5.25% पर पहुँच गयी। अक्टूबर में दाल की कीमतों में बेतहाशा 42% से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान ग्रामीण और शहरी, दोनों तरह की महँगाई दर में बढ़ोतरी दर्ज की गयी। (शेयर मंथन, 13 नवंबर 2015)