मोबाइल और इंटरनेट की पैठ, एम-कॉमर्स बिक्री, भुगतान विकल्पों और आकर्षक छूटों के बढ़ने से भारतीय ई-कॉमर्स बाजार के वर्ष 2017 तक 128 अरब डॉलर के स्तर तक पहुँचने की संभावना है।
फिलहाल 2015 में भारतीय ई-कॉमर्स बाजार 42 अरब डॉलर का है। यह बातें एसोचैम और डेलॉयट के संयुक्त अध्ययन में निकल कर सामने आयी हैं।
ई-कॉमर्स का भविष्य : नवोन्मेष का अनावरण’ नामक इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ई-कॉमर्स बाजार 2010 के 4.4 अरब डॉलर से लगातार बढ़ता हुआ 2014 में 13.6 अरब डॉलर का हो गया। पिछले एक साल में इन बढ़ते ई-कॉमर्स महारथियों के विलय एवं अधिग्रहण सौदों और आकाश छूते मूल्याँकन ने दिखाया कि इस क्षेत्र की ऊष्मा बढ़ रही है। इन सौदों में स्नैपडील के साथ सॉफ्टबैंक का 62.7 करोड़ डॉलर का सौदा, फ्लिपकार्ट द्वारा 37 करोड़ डॉलर में मिंत्रा का अधिग्रहण और ओला कैब द्वारा 20 करोड़ डॉलर में टैक्सीफॉरश्योर का अधिग्रहण शामिल है। सवाल यह है कि लाभप्रदता के कोई संकेत न होने के बावजूद क्या ये मूल्याँकन टिकाऊ होंगे। अमेजॉन और अलीबाबा के पास निरंतर वित्तपोषण समर्थन के लिए अपनी पितृ कंपनियों का सहारा है। घरेलू कंपनियों को क्षेत्र पर बने निवेशकों के भरोसे को संरक्षित रखने के लिए निश्चित रूप से भिन्न उपाय की जरूरत होगी।
बड़ी खुदरा कंपनियाँ अपनी वृद्धि दर बढ़ाने के लिएऑनलाइन प्लेफॉर्म के लाभ उठाने के लिए अपनी डिजिटल रणनीतियों पर ध्यान बढ़ा रही हैं। ई-कॉमर्स कंपनियाँ उच्च वृद्धि के लिए अपने मोबाइल ऐप्प की पैठ बढ़ाने के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। इस क्षेत्र की बड़ी कंपनियों का दावा है कि उनकी आय का 50% से ज्यादा हिस्सा मोबाइल ऐप्प के जरिये आ रहा है।
रिपोर्ट जारी करते हुए एसोचैम के महासचिव डी.एस रावत ने कहा कि भारत भारत जैसे देश, जहाँ दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में हर जगह पहुँचने के लिए बुनियादी ढाँचा पूरी तरह विकसित नहीं है, में ई-कॉमर्स व्यवसाय में आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक का प्रबंधन करना अत्यंत जटिल है। भिन्न व्यावसायिक प्रारूपों और भुगतान विकल्पों चलते ई-व्यवसाय के लिए सुपरिभाषित कराधान नीतियाँ नहीं हैं। वस्तु और सेवाओं की ऑनलाइन बिक्री सीमा पार होने से जटिलता और बढ़ जाती है। इसके अलावा ई-व्यवसायों ने सुरक्षा विकल्प लागू करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाये जो उपभोक्ता को ऑनलाइन सौदे करने से रोकते हैं। एनालिटिक्स, स्वायत्त वाहन, सोशल कॉमर्स, और 3डी प्रकाशन वे नयी प्रौद्योगिकियाँ हैं जो ऑनलाइन व्यवसाय में उल्लेखनीय मिसालिया बदलाव ला सकती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-कॉमर्स का भविष्य सुनहरा है और मोबाइल प्लेटफॉर्म, वैयक्तिकीकरण, सोशल मीडिया एनालिटिक्स, चतुर्दिक माध्यम सेवा और सस्ते व्यावसायिक प्रारूपों की साझेदारी से इस क्षेत्र की वृद्धि होगी। (शेयर मंथन, 08 दिसंबर, 2015)