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इस साल शेयर बाजार की कैसी रहेगी चाल? कौन-से हैं टी. एस. हरिहर के पसंदीदा शेयर?

भारतीय शेयर बाजार को लेकर एचआरबीवी क्लाइंट सॉल्यूशंस के मुख्य कार्यकारी टी. एस. हरिहर का नजरिया 1 साल के लिए आशावाद का संकेत देता है। 

भारतीय शेयर बाजार को लेकर एचआरबीवी क्लाइंट सॉल्यूशंस के मुख्य कार्यकारी टी. एस. हरिहर का आकलन संतुलित लेकिन आशावादी है। उनका मानना है कि वास्तविक जीडीपी में मजबूत वृद्धि, बड़ा घरेलू कारोबार आधार और रुपये में संभावित सुधार आने वाले महीनों में बाजार को सहारा देंगे। हालाँकि भूराजनीतिक जोखिम और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के प्रवाह में उतार-चढ़ाव को वे प्रमुख चुनौती मानते हैं।

हरिहर के अनुसार, जून 2026 के अंत तक सेंसेक्स 88,500 और निफ्टी 27,300 के स्तर तक पहुँच सकता है। अगले 12 महीनों के लिए उनका आकलन और भी मजबूत है। दिसंबर 2026 तक वे सेंसेक्स को 91,000 और निफ्टी को 28,200 के स्तर पर देखते हैं। 

टी. एस. हरिहर के अनुमान

सेंसेक्स लक्ष्य (जून 2026)

88,500

निफ्टी लक्ष्य (जून 2026)

27,300

सेंसेक्स लक्ष्य (दिसंबर 2026)

91,000

निफ्टी लक्ष्य (दिसंबर 2026)

28,200

2025-26 में निफ्टी ईपीएस (रु.)

1200

2026-27 में निफ्टी ईपीएस (रु.)

1330

2025-26 की दूसरी छमाही में कॉर्पोरेट आय वृद्धि

0-10%

2025-26 में जीडीपी वृद्धि

7.6%

2026-27 में जीडीपी वृद्धि

7.3%

अगले 6 माह में डॉलर-रुपया विनिमय दर

रुपया मजबूत होगा

अमेरिका से ट्रेड डील कब तक

दिसंबर 2026

सेंसेक्स 1 लाख पर किस वर्ष तक पहुँचेगा

2028

टी. एस. हरिहर के अनुसार आने वाले छह महीनों में अमेरिकी शुल्क नीति, तिमाही नतीजे, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और बजट 2026-27 को वे बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक मानते हैं। अमेरिकी शुल्कों का असर उनके अनुसार भारतीय बाजारों पर हल्का नकारात्मक रहने वाला है। उन्हें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के दिसंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना दिख रही है।

आगामी आम बजट से हरिहर को कर ढाँचे में राहत, पीएलआई योजनाओं को मजबूत प्रोत्साहन और बुनियादी ढाँचे के मौद्रीकरण पर जोर दिये जाने की उम्मीद है। उनका मानना है कि बजट का समग्र असर बाजार पर हल्का सकारात्मक रहेगा।

ब्याज दरों को लेकर उनका आकलन है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और भारतीय रिजर्व बैंक दोनों ही आगे अधिकतम 25 आधार अंकों तक की कटौती कर सकते हैं। निजी पूँजीगत व्यय की बहाली को वे चालू वित्त वर्ष में सीमित मानते हैं और इसके अगले वित्त वर्ष में गति पकड़ने की संभावना देखते हैं।

वैश्विक मोर्चे पर भूराजनीतिक स्थिति, तरलता और फेड की ब्याज दर नीति भारतीय बाजारों को सबसे अधिक प्रभावित कर सकती है। विदेशी निवेश प्रवाह में उनकी अपेक्षा वित्त वर्ष 2027 में सुधार की है। डॉलर-रुपया विनिमय दर को लेकर उनका अनुमान है कि अगले छह महीनों में रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हो सकता है।

अगले 1 साल में पसंदीदा क्षेत्र/शेयर

तेजी वाले क्षेत्र : सरकारी बैंक, धातु और रक्षा
कमजोर क्षेत्र : सूचना प्रौद्योगिकी, एफएमसीजी और दवा
5 पसंदीदा शेयर : इंडियन बैंक, एसबीआई, बीईएल, हिंडाल्को और हिंदुस्तान कॉपर

(शेयर मंथन, 14 जनवरी 2026)

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