क्या निफ्टी में गिरावट के बाद वापसी की उम्मीद है? जानिए बाजार के अहम स्तर
भारतीय शेयर बाजार में हालिया गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या निफ्टी मौजूदा स्तरों से वापसी कर सकता है।
भारतीय शेयर बाजार में हालिया गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या निफ्टी मौजूदा स्तरों से वापसी कर सकता है।
भारतीय शेयर बाजार के भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख रखते हुए बाजार विशेषज्ञ अशोक कुमार अग्रवाल का मानना है कि भारतीय कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा बना हुआ है।
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों के लिए केवल सही फंड चुनना ही महत्वपूर्ण नहीं है।
भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले ज्यादातर लोग सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स पर नजर रखते हैं, लेकिन क्या ये इंडेक्स पूरे बाजार की वास्तविक तस्वीर दिखाते हैं?
भारतीय शेयर बाजार में पिछले करीब दो वर्षों से जारी कमजोरी को लेकर टैक्सेशन और बढ़ती ट्रांजैक्शन कॉस्ट को भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा माना जा रहा है।
शेयर बाजार में हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और बड़े संस्थागत निवेशकों की मौजूदगी को लेकर छोटे निवेशकों के बीच यह धारणा बढ़ रही है कि इतनी तेज गति से होने वाली ट्रेडिंग के सामने आम निवेशक के लिए मुनाफा कमाना मुश्किल हो गया है।
वैल्यू निवेश में केवल किसी शेयर का सस्ता दिखना ही पर्याप्त नहीं है।
स्मॉल, मिड और लार्जकैप- तीनों सेगमेंट में अवसर मौजूद हैं, लेकिन निवेश का रुख चयनात्मक होना चाहिए।
बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर को लेकर फंड मैनेजर का रुख सकारात्मक बना हुआ है।
मौजूदा बाजार में व्यापक इंडेक्स के स्तर पर भले ही बहुत ज्यादा रिटर्न देखने को नहीं मिला हो, लेकिन अलग-अलग सेक्टर और स्टॉक्स में प्रदर्शन काफी अलग रहा है।
रेपो रेट बढ़ाने के बावजूद RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर अपना अनुमान बेहतर किया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बाजार की उम्मीदों के अनुरूप बुधवार को रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.25% से बढ़ाकर 5.5% कर दिया है।
निफ्टी आईटी में पिछले करीब छह हफ्तों से कमजोरी का रुझान बना हुआ है, हालांकि हाल के दिनों में इंडेक्स के निचले स्तरों पर कुछ स्थिरता दिखाई दी है।
निफ्टी बैंक के लिए 54,000 के आसपास का स्तर अहम सपोर्ट जोन बन सकता है।
निफ्टी बैंक के मौजूदा वैल्यूएशन को देखते हुए बैंकिंग इंडेक्स में अब बड़ी गिरावट की गुंजाइश कम नजर आ रही है।
जब सेकेंडरी मार्केट में सुस्ती दिखाई दे रही है, उसी समय आईपीओ बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।