क्या ज्यादा टैक्स और बढ़ती लागत भारतीय शेयर बाजार के लिए बन रही है चुनौती?
भारतीय शेयर बाजार में लंबे समय से चल रही कमजोरी के बीच बाजार से जुड़े टैक्स और लेनदेन की लागत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार में लंबे समय से चल रही कमजोरी के बीच बाजार से जुड़े टैक्स और लेनदेन की लागत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पिछले करीब दो वर्षों से भारतीय शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
कृषि कमोडिटी बाजार में आने वाले समय में तेजी की नई संभावना बनती दिखाई दे रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई से जुड़ी चिंताएं हैं।
भारतीय कमोडिटी बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की भागीदारी बढ़ने से आने वाले समय में बाजार की लिक्विडिटी और कारोबार में सुधार देखने को मिल सकता है।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच गोल्ड और सिल्वर को सुरक्षित निवेश विकल्पों के तौर पर देखा जाता है।
सोने की कीमतों को लेकर बाजार में लगातार चर्चा बनी हुई है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमतें एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं।
भारतीय शेयर बाजार में जारी कमजोरी के पीछे विदेशी फंड फ्लो और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।
भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के बीच निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाजार में दोबारा तेजी कब लौटेगी।
भारतीय शेयर बाजार में लगातार कमजोरी के बीच निफ्टी करीब 22,400 के स्तर तक पहुंच गया है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर बातचीत में भारत में वाहनों की प्रति व्यक्ति उपलब्धता विकसित और कई विकासशील देशों की तुलना में कम होने की बात कही गई।
बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स को लेकर बातचीत में बताया गया कि यह इंडेक्स कारोबार और उद्योग जगत के लोगों के सेंटिमेंट्स को कैप्चर करने का प्रयास है।
पीआई इंडस्ट्रीज को लेकर निवेशकों के बीच आगे की दिशा को लेकर सवाल बना हुआ है।
एचडीएफसी लाइफ को लेकर चर्चा में एक ऐसी रणनीति बताई गई जिसमें लंबे समय के निवेश और टैक्टिकल मुनाफावसूली दोनों को साथ रखा गया है।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ के शेयर में हालिया गिरावट के बावजूद वैल्यूएशन को लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं।