एक्सपर्ट से जानें सोने-चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, सालभर के टारगेट जनवरी में पूरे
कमोडिटी बाजार में इस समय जो हलचल दिख रही है, वह असाधारण है। सोने और चांदी दोनों ने नई ऊंचाइयों को छू लिया है।
कमोडिटी बाजार में इस समय जो हलचल दिख रही है, वह असाधारण है। सोने और चांदी दोनों ने नई ऊंचाइयों को छू लिया है।
बजट से पहले बाजार में बनने वाली पारंपरिक तेजी इस बार थोड़ी कमजोर दिखाई दे रही है। आमतौर पर बजट से पहले निवेशक किसी बड़े ऐलान की उम्मीद में पोज़िशन बनाते हैं, लेकिन इस बार माहौल अलग है।
अमेरिकी बाजारों में हालिया उतार-चढ़ाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। हालांकि यह गिरावट फिलहाल एक सामान्य करेक्शन जैसी दिखती है। जियोपॉलिटिकल तनावों से डर जरूर बना है, लेकिन लंबे और बड़े युद्ध की संभावना कम मानी जा रही है, खासकर अमेरिका के बढ़ते कर्ज को देखते हुए।
इस हफ्ते शेयर बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। हफ्ते की शुरुआत में तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, हालांकि बाजार ने काफी हद तक खुद को संभाला।
पीपीएफएस म्यूचुअल फंड अपने नए लार्ज कैप एनएफओ के जरिए उन निवेशकों को टारगेट कर रहा है, जो लार्ज कैप यूनिवर्स का व्यापक एक्सपोज़र चाहते हैं लेकिन अत्यधिक एक्टिव मैनेजमेंट का जोखिम नहीं लेना चाहते।
मिड कैप इंडेक्स की मौजूदा संरचना काफी हद तक निफ्टी जैसी बनती दिख रही है। मिड कैप फिलहाल कंसोलिडेशन मोड में है और किसी भी निर्णायक ब्रेकआउट के लिए मजबूत ट्रिगर की जरूरत है।
आईटी सेक्टर में हालिया नतीजों के बाद निफ्टी आईटी इंडेक्स में जो मजबूती दिखी है, उसने बाजार में एक नई उम्मीद जरूर जगाई है।
इन्फोसिस के नतीजों के बाद IT सेक्टर में जो उत्साह देखने को मिला, उसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी की ग्रोथ गाइडेंस रही।
विप्रो का ताजा रिजल्ट कुल मिलाकर ठीक-ठाक कहा जा सकता है। बाजार में पहले से ही यह धारणा बनी हुई थी कि यह क्वार्टर बहुत मजबूत नहीं रहेगा, इसलिए एक्सपेक्टेशंस काफी म्यूटेड थीं।
कमोडिटी बाजार में इस समय जो तस्वीर सामने आ रही है, वह ऐतिहासिक कही जा सकती है। एक तरफ सोना लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और एमसीएक्स पर 1.5 लाख रुपये के पार निकल चुका है, वहीं दूसरी तरफ चाँदी ने भी निवेशकों को चौंका दिया है।
सोना के बाजार में इस समय जो हलचल दिख रही है। वह निवेशकों के लिए जितनी आकर्षक है, उतनी ही जोखिम भरी भी है।
सोना और चांदी के बाजार में इस समय जो हलचल दिख रही है, वह निवेशकों के लिए जितनी आकर्षक है, उतनी ही जोखिम भरी भी है।
फेडरल बैंक (Federal Bank) के हालिया तिमाही नतीजे वाकई काफी मजबूत रहे हैं और बाजार की प्रतिक्रिया भी उसी के अनुरूप देखने को मिली।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के तीसरी तिमाही के नतीजे सामने आ चुके हैं और आंकड़ों के हिसाब से इसमें मुनाफे में करीब 32% की बढ़त देखने को मिली है।
आईसीआईसीआई बैंक को लेकर इस समय बैंकों के सेक्टर में तस्वीर काफी हद तक साफ नजर आती है। मौजूदा हालात में बैंकिंग सेक्टर के लिए सबसे बड़ा बैरोमीटर क्रेडिट ग्रोथ है।
पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में एचडीएफसी बैंक के शेयर में तेज गिरावट देखने को मिली है, जिससे निवेशकों के मन में स्वाभाविक सवाल है कि अगर नतीजे ठीक-ठाक या बाजार को खुश करने वाले आते हैं, तो क्या यह गिरावट थमेगी और रुख पलटेगा।