जियोपॉलिटिकल तनाव के बावजूद सोना और चाँदी के भाव कमजोर क्यों है?
वैश्विक अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम के बीच सोने और चाँदी की चाल को लेकर निवेशकों में काफी कन्फ्यूजन बना हुआ है।
वैश्विक अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम के बीच सोने और चाँदी की चाल को लेकर निवेशकों में काफी कन्फ्यूजन बना हुआ है।
अनुराग जानना चाहते हैं कि उन्हें आईआरसीटीसी (IRCTC) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?
एचडीएफसी बैंक को लेकर निवेशकों के बीच लगातार दिलचस्पी बनी हुई है, खासकर जब बात लंबी अवधि यानी 5 साल के निवेश की आती है।
वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोना एक बार फिर निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चितता लगातार बढ़ती दिख रही है। हालिया घटनाक्रम में युद्धविराम की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
राजू कुमार प्रसाद जानना चाहते हैं कि उन्हें यस बैंक (YES Bank) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?
ईएमएस (इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज) सेक्टर को लेकर निवेशकों के मन में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या इसमें आई तेजी के बाद अब वैल्यूएशन सही स्तर पर आ चुके हैं।
आईटी सेक्टर को लेकर इस समय बाजार में जो सबसे बड़ा डर है, वह केवल वैश्विक नीतियों या वीजा नियमों से जुड़ा नहीं है।
शेयर बाजार में निवेश करते समय सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि आखिर किस शेयर को चुना जाए। लेकिन किसी एक व्यक्ति या विशेषज्ञ से सीधे “नाम” लेने के बजाय यह समझना ज्यादा जरूरी है कि सही शेयर तक पहुंचा कैसे जाए।
आरबीआई की नीतियों को लेकर बाजार में जो चिंता उभर रही है, उसका मूल कारण बढ़ती महँगाई और रुपये पर दबाव है।
एक निवेशक जानना चाहते हैं कि उन्हें इरेडा (IREDA) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?
अभिषेक कोठारी जानना चाहते हैं कि उन्हें अंबुजा सीमेंट (Ambuja Cement) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?
पिछले दो वर्षों में बाजार की चाल को लेकर निवेशकों के मन में एक बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या यह सिर्फ ठहराव (कंसोलिडेशन) है या फिर कमजोरी का संकेत।
आईटी सेक्टर में पिछले कुछ समय से जिस “बॉटमिंग आउट” की प्रक्रिया के संकेत मिल रहे थे, वह अब और स्पष्ट होती दिख रही है।
पिछले छह–सात हफ्तों से जिस अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव का बाजार पर दबाव बना हुआ था, उसमें अचानक एक सकारात्मक मोड़ देखने को मिला जब वैश्विक स्तर पर नरमी के संकेत आए।
हालिया बाजार परिस्थितियों में 23,700 से 24,000 के दायरे को एक महत्वपूर्ण रेंज के रूप में देखा जा रहा है, जहां निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में रणनीतिक बदलाव करने की जरूरत हो सकती है।