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बनी रहेगी आर्थिक वृद्धि की रफ्तार, कमजोर रुपये से पड़ेगी महंगाई की मार: आर्थिक समीक्षा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के बजट सत्र की शुरुआत के अगले ही दिन लोकसभा में आर्थिक समीक्षा 2025–26 पेश की।

आर्थिक कार्य विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंथा नागेश्वरन की देखरेख में तैयार यह दस्तावेज देश की अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के आकलन को सामने रखता है। हर साल की तरह इस बार की आर्थिक समीक्षा में भी आर्थिक विकास के कारकों, राजकोषीय स्थिति, बाह्य क्षेत्र की मजबूती, महंगाई, रोजगार और संरचनात्मक सुधारों की दिशा पर विस्तार से चर्चा की गयी है। समग्र तस्वीर यह संकेत देती है कि भारत की आर्थिक गति बनी रहेगी, लेकिन बाहरी मोर्चे पर चुनौतियाँ और रुपये की कमजोरी महंगाई के जोखिम को बढ़ा सकती है।

संसद के मौजूदा बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को हुई। उसके बाद आज 29 जनवरी को सत्र के दूसरे दिन संसद में आर्थिक समीक्षा पेश की गयी। अब दो दिन सदन की कार्यवाही स्थगित रहेगी। रविवार, 1 फरवरी को संसद की कार्यवाही फिर शुरू होगी, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगी।

आर्थिक वृद्धि की तस्वीर

आर्थिक समीक्षा के अनुसार, भारत की वृद्धि की गति मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2026–27 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि 6.8% से 7.2% के दायरे में रहने का अनुमान है। यह चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 7.4% से कुछ कम है, लेकिन फिर भी इसे स्थिर और संतुलित वृद्धि माना गया है। समीक्षा के पहले अग्रिम अनुमान में वित्त वर्ष 2025–26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4% और सकल मूल्य वर्धन वृद्धि 7.3% आंकी गयी है।

महंगाई और कीमतों का रुझान

समीक्षा में कहा गया है कि महंगाई फिलहाल नियंत्रण में और स्थिर बनी हुई है। मुख्य महंगाई दर के दबाव कम होने को आपूर्ति पक्ष की स्थितियों में सुधार का संकेत माना गया है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान घरेलू महंगाई औसतन 1.7% रही। हालाँकि, समीक्षा ने यह भी चेताया है कि विदेशी पूँजी प्रवाह में कमी और रुपये की कमजोरी भविष्य में महंगाई पर दबाव बना सकती है। आर्थिक समीक्षा के अनुसार, बाहरी कारणों से महंगाई में धीरे-धीरे वृद्धि होगी, लेकिन यह अगले वित्त वर्ष में भी रिजर्व बैंक के दायरे में ही रहेगी।

रुपये और बाह्य क्षेत्र की चुनौती

आर्थिक समीक्षा में एक अहम विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया गया है। देश की घरेलू आर्थिक बुनियाद मजबूत है, लेकिन बाह्य क्षेत्र में संवेदनशीलता बनी हुई है। विदेशी पूँजी प्रवाह में कमी और मुद्रा पर दबाव के चलते 2025 में रुपये का प्रदर्शन कमजोर रहा। समीक्षा के अनुसार, यह स्थिति महंगाई और बाह्य स्थिरता दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। इसके बावजूद भारत का बाह्य सुरक्षा कवच मजबूत बताया गया है। जनवरी 2026 तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार 701.4 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जो 11 महीने के आयात और 94% बाह्य ऋण को कवर करने के लिए पर्याप्त है।

राजकोषीय स्थिति और चेतावनी

राजकोषीय मोर्चे पर केंद्र सरकार की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई गयी है। वित्त वर्ष 2024–25 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 4.8% पर रहा, जो बजट अनुमान से कम है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घाटे का लक्ष्य 4.4% रखा गया है। हालाँकि समीक्षा में राज्यों की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता जतायी गयी है। राज्य स्तर पर बढ़ते राजस्व घाटे, बिना शर्त नकद हस्तांतरण और लोकलुभावन नीतियों के कारण पूँजीगत व्यय पर दबाव पड़ने की बात कही गयी है। समीक्षा का कहना है कि कमजोर राज्य वित्त अब संप्रभु उधारी लागत को भी प्रभावित करने लगे हैं, क्योंकि निवेशक समग्र सरकारी वित्त को देखते हैं, न कि केवल केंद्र की स्थिति को।

निवेश और पूँजीगत व्यय

आर्थिक समीक्षा में पूँजीगत व्यय को विकास का प्रमुख इंजन बताया गया है। केंद्र का पूँजीगत खर्च वित्त वर्ष 2017–18 के 2.63 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025–26 के बजट अनुमान में 11.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। प्रभावी पूँजीगत व्यय को 15.48 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। इससे अवसंरचना क्षेत्र में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की बात कही गयी है।

वैश्विक व्यापार और निर्यात

समीक्षा के अनुसार वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2005 से 2024 के बीच वैश्विक वस्तु निर्यात में भारत की हिस्सेदारी लगभग दोगुनी होकर 1% से 1.8% हो गयी है। यह बताता है कि देश की विनिर्माण और निर्यात क्षमता में सुधार हो रहा है।

नवाचार और उद्योग

भारत की नवाचार क्षमता में भी लगातार सुधार दर्ज किया गया है। वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की रैंक 2019 में 66 से सुधरकर 2025 में 38 हो गयी है। उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं के तहत 14 क्षेत्रों में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वास्तविक निवेश हुआ है, जिससे 18.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त उत्पादन और बिक्री तथा 12.6 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भी प्रगति हुई है, जहाँ भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 10 परियोजनाएँ आगे बढ़ी हैं।

बुनियादी संरचना और परिवहन

आर्थिक समीक्षा में बुनियादी संरचना के विस्तार को विकास की मजबूत कड़ी बताया गया है। उच्च गति वाले गलियारों की लंबाई वित्त वर्ष 2013–14 के 550 किलोमीटर से बढ़कर दिसंबर 2025 तक 5,364 किलोमीटर हो गयी है। वित्त वर्ष 2025–26 में 3,500 किलोमीटर रेलवे लाइन जोड़ी गयी है। देश का घरेलू विमानन बाजार दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा बन चुका है। 2014 में जहाँ 74 हवाई अड्डे थे, वहीं 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 164 हो गयी है।

कृषि, ऊर्जा और अन्य क्षेत्र

कृषि वर्ष 2024–25 में खाद्यान्न उत्पादन 3,577.3 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष से 254.3 लाख मीट्रिक टन अधिक है। ऊर्जा क्षेत्र में भारत नवीकरणीय ऊर्जा और स्थापित सौर क्षमता में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है। बिजली वितरण कंपनियों ने वित्त वर्ष 2024–25 में पहली बार 2,701 करोड़ रुपये का सकारात्मक लाभ दर्ज किया।

सामाजिक क्षेत्र और मानव विकास

समीक्षा में सामाजिक संकेतकों में सुधार को भी रेखांकित किया गया है। प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात क्रमशः 90.9, 90.3 और 78.7 दर्ज किया गया है। देश में अब 23 आईआईटी, 21 आईआईएम और 20 एम्स हैं, साथ ही दो अंतरराष्ट्रीय आईआईटी परिसरों की स्थापना भी हुई है। मातृ और शिशु मृत्यु दर में 1990 के बाद से तेज गिरावट दर्ज की गयी है, जो वैश्विक औसत से बेहतर है। ई-श्रम पोर्टल पर जनवरी 2026 तक 31 करोड़ से अधिक असंगठित कामगार पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें 54% महिलाएँ हैं।

गरीबी और समावेशन

आर्थिक समीक्षा के अनुसार बहुआयामी गरीबी में तेज गिरावट आयी है। 2005–06 में जहाँ गरीबी दर 55.3% थी, वहीं 2022–23 में यह कम होकर 11.28% रह गयी है। जन-धन योजना के तहत मार्च 2025 तक 55.02 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों की है।

(शेयर मंथन, 29 जनवरी 2026)

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