लगभग एक दशक से भारतीय शेयर बाजार में तेजी के कई दौर देख चुके निवेशकों के लिए आने वाला समय उत्साह और सावधानी- दोनों का मिश्रण लेकर आ सकता है।
यह राय है बाजार विशेषज्ञ एवं www.viveknegi.com के संस्थापक विवेक कुमार नेगी की। उनका मानना है कि घरेलू खपत, सुधारों की निरंतरता और सकारात्मक आर्थिक दृष्टिकोण भारतीय बाजार के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं। हालाँकि पड़ोसी देशों में भू-राजनीतिक हालात और अमेरिका से जुड़ी नीतिगत अनिश्चितताएँ इस तेजी की रफ्तार पर असर डाल सकती हैं।
विवेक कुमार नेगी के अनुमान |
|
|
सेंसेक्स लक्ष्य (जून 2026) |
97,500 |
|
निफ्टी लक्ष्य (जून 2026) |
29,500 |
|
सेंसेक्स लक्ष्य (दिसंबर 2026) |
1,10,000 |
|
निफ्टी लक्ष्य (दिसंबर 2026) |
34,750 |
|
2025-26 में निफ्टी ईपीएस (रु.) |
1,250 |
|
2026-27 में निफ्टी ईपीएस (रु.) |
1,380 |
|
2025-26 की दूसरी छमाही में कॉर्पोरेट आय वृद्धि |
10-20% |
|
2025-26 में जीडीपी वृद्धि |
7.2% |
|
2026-27 में जीडीपी वृद्धि |
8% |
|
अगले 6 माह में डॉलर-रुपया विनिमय दर |
87-95 |
|
अमेरिका से ट्रेड डील कब तक |
दिसंबर 2026 |
|
सेंसेक्स 1 लाख पर किस वर्ष तक पहुँचेगा |
2026 |
मौजूदा समय में भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़े सकारात्मक कारकों में विवेक कुमार नेगी घरेलू खपत की मजबूती, आर्थिक सुधारों की निरंतरता और भारत को लेकर समग्र सकारात्मक दृष्टिकोण को गिनाते हैं। वहीं दूसरी ओर, वैश्विक कारक और पड़ोसी देशों में भू-राजनीतिक अनिश्चितता को वे बाजार के लिए सबसे बड़े नकारात्मक जोखिम के रूप में देखते हैं। वैश्विक बाजारों की तुलना में उनका मानना है कि अगले 12 महीनों में भारतीय बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
आने वाले छह महीनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में वे अमेरिकी शुल्क, तिमाही नतीजे, भू-राजनीति और आम बजट 2026-27 को मानते हैं। उनका कहना है कि अमेरिकी शुल्क का असर हल्का नकारात्मक हो सकता है। उन्हें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के दिसंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना दिख रही है।
आगामी आम बजट को लेकर उनका आकलन अपेक्षाकृत सीमित उम्मीदों का है। हालाँकि वे मानते हैं कि रक्षा, कृषि और अवसंरचना क्षेत्रों में पूँजीगत व्यय बढ़ाया जा सकता है, जिसका असर बाजार पर हल्का सकारात्मक रह सकता है।
ब्याज दरों के मोर्चे पर विवेक कुमार नेगी का मानना है कि इस साल अमेरिका और भारत- दोनों जगह दरें स्थिर रह सकती हैं। वैश्विक स्तर पर आने वाले महीनों में भू-राजनीतिक परिदृश्य और अमेरिकी शुल्क नीति भारतीय बाजारों को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले कारक रह सकते हैं।
विदेशी निवेश प्रवाह को लेकर उनका मानना है कि बिकवाली का दौर थम सकता है। हालाँकि नयी खरीदारी आने में अभी समय लगेगा।
अगले 1 साल में पसंदीदा क्षेत्र/शेयर
तेजी वाले क्षेत्र : प्राथमिकता उपभोग आधारित क्षेत्र, बैंकिंग और धातु
5 पसंदीदा शेयर : एचएएल, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, निप्पॉन एएमसी, सोलर इंडस्ट्रीज और पीएफसी
(शेयर मंथन, 21 जनवरी 2026)