तकनीकी संकेतों और दीर्घकालिक रुझानों के आधार पर देखें तो भारतीय शेयर बाजार की बुनियादी दिशा अब भी ऊपर की ओर बनी हुई है।
बोनांजा पोर्टफोलियो लिमिटेड का मानना है कि हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय बाजार एक सेक्युलर बुल मार्केट के भीतर ही कारोबार कर रहा है। उनके अनुसार भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक शुल्क से जुड़ी अनिश्चितता के चलते बीच-बीच में गिरावट (करेक्शन) जरूर आ सकते हैं, लेकिन इन्हें दीर्घकालिक निवेश के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
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बोनांजा पोर्टफोलियो के अनुमान |
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सेंसेक्स लक्ष्य (जून 2026) |
91,500 |
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निफ्टी लक्ष्य (जून 2026) |
28,200 |
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सेंसेक्स लक्ष्य (दिसंबर 2026) |
97,500 |
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निफ्टी लक्ष्य (दिसंबर 2026) |
30,000 |
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2025-26 में निफ्टी ईपीएस (रु.) |
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2026-27 में निफ्टी ईपीएस (रु.) |
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2025-26 की दूसरी छमाही में कॉर्पोरेट आय वृद्धि |
10-20% |
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2025-26 में जीडीपी वृद्धि |
7.5% |
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2026-27 में जीडीपी वृद्धि |
7.4% |
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अगले 6 माह में डॉलर-रुपया विनिमय दर |
88-92 |
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अमेरिका से ट्रेड डील कब तक |
मार्च 2026 |
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सेंसेक्स 1 लाख पर किस वर्ष तक पहुँचेगा |
2027 |
बोनांजा पोर्टफोलियो के अनुसार, अभी बाजार के लिए सबसे बड़े सहायक कारकों में कम महँगाई, कच्चे तेल की स्थिर कीमतें, राजनीतिक स्थिरता, म्यूचुअल फंड के जरिये बढ़ता घरेलू निवेश, और सुधार प्रक्रिया की निरंतरता शामिल हैं। इन कारकों के चलते भारतीय बाजार की बुनियादी मजबूती बनी हुई है। दूसरी ओर, विदेशी निवेशकों के बीच बना नकारात्मक भाव और वैश्विक स्तर पर युद्ध जैसी परिस्थितियों से उपजी अनिश्चितता बाजार की तेजी पर फिलहाल कुछ सीमा लगा रही है। हालाँकि बोनांजा पोर्टफोलियो का मानना है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर स्थिति साफ होते ही विदेशी निवेशकों की धारणा में भी सुधार देखने को मिल सकता है।
बोनांजा पोर्टफोलियो का आकलन है कि अगले 12 महीनों में भारतीय बाजार वैश्विक बाजारों से बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है। आने वाले छह महीनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारण अमेरिकी शुल्क और भू-राजनीतिक घटनाक्रम हैं। शुल्कों का असर बाजार पर हल्का नकारात्मक हो सकता है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौता मार्च तक हो सकता है।
बजट में तरलता पर समर्थन, रिकवरी मैकेनिज्म, कर राहत और सुधारों पर जोर दिया जा सकता है, जिसका असर बाजार पर बड़ा सकारात्मक हो सकता है। अमेरिका और भारत—दोनों जगह आगे और कटौती की संभावना बनी हुई है। मध्यम अवधि में निजी पूँजीगत व्यय में व्यापक सुधार देखने को मिल सकता है।
तकनीकी दृष्टि से निफ्टी के दीर्घकालिक और मध्यावधि रुझान सकारात्मक हैं। निफ्टी के लिए 25,400 और 24,300 के स्तर मजबूत समर्थन के रूप में काम कर सकते हैं, जबकि ऊपर की ओर 27,500, 28,200 और 30,000 के स्तर अगले प्रमुख लक्ष्य हो सकते हैं।
अगले 1 साल में पसंदीदा क्षेत्र/शेयर
तेजी वाले क्षेत्र : बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ, रक्षा, उपभोग, आईटी, दवा और वाहन
कमजोर क्षेत्र : रियल एस्टेट, यूटिलिटीज और आवश्यक उपभोक्ता वस्तुएँ
5 पसंदीदा शेयर : टीवीएस मोटर, इंफोसिस, भारती एयरटेल, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा और एचडीएफसी एएमसी
(शेयर मंथन, 27 जनवरी 2026)