कमोडिटी बाजार में इस समय जो हलचल दिख रही है, वह असाधारण है। सोने और चांदी दोनों ने नई ऊंचाइयों को छू लिया है।
कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट वंदना भारती का कहना है कि एमसीएक्स पर सोना रिकॉर्ड स्तर 1,45,900 के पार निकल चुका है, वहीं चांदी भी 3,400 के आसपास पहुंच चुकी है। हैरानी की बात यह है कि साल 2026 के लिए जो लक्ष्य निवेशक पूरे साल के नजरिए से लेकर चल रहे थे, वे जनवरी खत्म होने से पहले ही हासिल होते नजर आ रहे हैं। ऐसे में अब यह सवाल और भी मुश्किल हो गया है कि आगे कीमतें कहां तक जा सकती हैं।
यह दौर इसलिए भी अनोखा है क्योंकि दशकों बाद दुनिया एक साथ इतने बड़े जियोपॉलिटिकल तनाव से गुजर रही है। ट्रेड वॉर, राजनीतिक अस्थिरता और देशों के बीच भरोसे की कमी ने सोने को एक बार फिर सबसे मजबूत सेफ हेवन बना दिया है। डॉलर और अमेरिकी नीतियों को लेकर बढ़ता अविश्वास भी सोने की कीमतों को सपोर्ट दे रहा है। देश हो या आम निवेशक, हर स्तर पर एक नर्वसनेस दिखाई दे रही है और इसका सीधा फायदा गोल्ड और सिल्वर को मिल रहा है।
हालिया तेजी के पीछे कई ठोस वजहें हैं। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के साथ ही ट्रेड वॉर एक बार फिर आक्रामक रूप में सामने आया है। पहले जहां यह चीन तक सीमित था, अब इसका दायरा पूरी दुनिया तक फैलता दिख रहा है। इसके साथ ही अमेरिका का कई वैश्विक समूहों से बाहर निकलना, अलग-अलग देशों पर टैरिफ की धमकियां और ईरान, वेनेजुएला, मेक्सिको जैसे देशों को लेकर आक्रामक बयानबाजी ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। इन हालात में सेंट्रल बैंकों की भारी खरीद, खासकर पोलैंड जैसे देशों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदना, इस रैली को और ईंधन दे रहा है।
दावोस में भले ही यह संकेत मिले हों कि तनाव कुछ कम हो सकता है, लेकिन बाजार उस पर भरोसा करता नहीं दिख रहा। एक तरफ मजबूत अमेरिकी डेटा, डॉलर में मजबूती और इक्विटी मार्केट में तेजी जैसे फैक्टर थे, जो आम तौर पर गोल्ड के लिए नकारात्मक माने जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद सोने में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई। इसका मतलब साफ है कि मौजूदा नैरेटिव आर्थिक से ज्यादा राजनीतिक और भरोसे से जुड़ा हुआ है, और जब तक यह भरोसे की कमी बनी रहेगी, गोल्ड पर दबाव आना मुश्किल है।
अगर आगे के लक्ष्यों की बात करें तो शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म को अलग-अलग देखना जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर अब 5,100 से 5,500 डॉलर की रेंज पर नजर है और साल के अंत तक 5,600–5,700 डॉलर के स्तर भी दिख सकते हैं। भारत में करेंसी के कमजोर रहने की स्थिति में सोने-चांदी पर प्रीमियम बना रह सकता है, जिससे घरेलू कीमतें और ऊंची जा सकती हैं। 2026 के दौरान भारतीय बाजार में सोना नए रिकॉर्ड स्तरों की ओर बढ़ सकता है।
हालांकि, इतनी तेज रैली के साथ जोखिम भी बढ़ता है। यह साफ तौर पर एक स्पेकुलेटिव मूव है और इसमें सावधानी बेहद जरूरी है। निवेशकों को एकमुश्त निवेश से बचना चाहिए और स्टैगर्ड तरीके से एंट्री करनी चाहिए। मौजूदा ऊंचे स्तरों पर पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर का वेट कम रखना बेहतर रहेगा। डिप आने पर ही खरीदारी की रणनीति ज्यादा सुरक्षित मानी जाएगी।
ट्रेडर्स के लिए यह बाजार और भी चुनौतीपूर्ण है। मार्जिन लगातार बढ़ रहे हैं और स्टॉप लॉस रखना आसान नहीं है। ऐसे हालात में फ्यूचर्स के बजाय ऑप्शंस में ट्रेड करना ज्यादा सुरक्षित विकल्प हो सकता है, जहां जोखिम प्रीमियम तक सीमित रहता है। बिना स्टॉप लॉस के ट्रेड करना इस समय बेहद खतरनाक हो सकता है।
कुल मिलाकर, गोल्ड और सिल्वर की लॉन्ग टर्म कहानी अभी भी मजबूत है, लेकिन शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव और तेज मूव्स का खतरा बना रहेगा। यह बाजार उन निवेशकों को इनाम देगा जो धैर्य और अनुशासन के साथ चलते हैं, न कि उन लोगों को जो तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसले लेते हैं।
(शेयर मंथन, 23 जनवरी 2026)
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