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इसी साल सेंसेक्स पार कर लेगा 1 लाख का लक्ष्य : अरविंद पृथी

जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तब कुछ निवेशक सतर्क हो जाते हैं और कुछ अवसर तलाशने लगते हैं। स्वतंत्र विश्लेषक अरविंद पृथी खुद को दूसरे वर्ग में रखते हैं।

अरविंद पृथी का साफ मानना है कि भारतीय शेयर बाजार में आने वाली हर गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का मौका साबित हो सकती है। 

अरविंद पृथी के अनुमान

सेंसेक्स लक्ष्य (जून 2026)

95,000

निफ्टी लक्ष्य (जून 2026)

 

सेंसेक्स लक्ष्य (दिसंबर 2026)

1,00,000

निफ्टी लक्ष्य (दिसंबर 2026)

 

2025-26 में निफ्टी ईपीएस (रु.)

1,040

2026-27 में निफ्टी ईपीएस (रु.)

1,110

2025-26 की दूसरी छमाही में कॉर्पोरेट आय वृद्धि

0-10%

2025-26 में जीडीपी वृद्धि

6.8%

2026-27 में जीडीपी वृद्धि

7.2%

अगले 6 माह में डॉलर-रुपया विनिमय दर

91-95

अमेरिका से ट्रेड डील कब तक

जून 2026

सेंसेक्स 1 लाख पर किस वर्ष तक पहुँचेगा

2026

अरविंद पृथी , भारतीय शेयर बाजार के लिए अभी सबसे बड़ा सकारात्मक कारक जीएसटी और व्यक्तिगत आयकर सुधार हैं। उनके अनुसार इन सुधारों के चलते निवेशकों के हाथ में अतिरिक्त नकदी आयी है, जिसका व्यापक असर घरेलू खपत पर दिख सकता है और यही बाजार के लिए दीर्घकालिक सहारा बनेगा। वहीं दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार युद्धों को वे भारतीय बाजारों के लिए सबसे बड़ा जोखिम मानते हैं। उनका कहना है कि इन कारणों से अल्पकालिक अस्थिरता जरूर आ सकती है, लेकिन इससे भारत की दीर्घकालिक विकास की कहानी कमजोर नहीं होती।


पृथी का मानना है कि अगले 12 महीनों में भारतीय बाजारों की चाल वैश्विक बाजारों के अनुरूप रह सकती है। आने वाले छह महीनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में अमेरिकी शुल्क, भू-राजनीति और आम बजट 2026-27 शामिल हैं। शुल्कों का असर भारतीय बाजार पर हल्का नकारात्मक हो सकता है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जून 2026 तक अंतिम रूप लेने की संभावना है।

आगामी आम बजट से अरविंद पृथी की अपेक्षा है कि सरकार शुल्क से जुड़े झटकों का सामना करने के लिए कर राहत और नीतिगत समर्थन पर ध्यान देगी। उनके अनुसार बजट का समग्र असर बाजार के लिए हल्का सकारात्मक हो सकता है। ब्याज दरों को लेकर उनका मानना है कि निकट भविष्य में भारतीय रिजर्व बैंक यथास्थिति बनाये रख सकता शुल्क से जुड़े प्रभावों के चलते निजी पूँजीगत व्यय कुछ समय तक दबा रह सकता है। हालाँकि सरकार के नेतृत्व में पूँजीगत व्यय आगे बढ़ता रहेगा।

वैश्विक स्तर पर भू-राजनीति और शुल्क नीति आने वाले महीनों में भारतीय बाजारों को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले कारक रह सकते हैं। विदेशी निवेश प्रवाह को लेकर उनकी अपेक्षाएँ संतुलित हैं।

 

अगले 1 साल में पसंदीदा क्षेत्र/शेयर

तेजी वाले क्षेत्र : बैंकिंग, एनबीएफसी, उपभोग, ऊर्जा और धातु 

कमजोर क्षेत्र : आईटी, ऑटो सहायक उद्योग और रियल एस्टेट

(शेयर मंथन, 21 जनवरी 2026)

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