शेयर बाजार को लेकर साइकस एंड रे इक्विटीज (इंडिया) लिमिटेड के फंड मैनेजर नितेश चंद का आकलन आने वाले महीनों में सतर्कता का संकेत देता है।
नितेश चंद का मानना है कि अमेरिकी बाजारों में लंबे समय से चली आ रही तेजी के बाद जिस तरह का पैटर्न उभरा है, उसका असर भारतीय बाजारों पर भी दिख सकता है। बीते 100 वर्षों में अमेरिकी बाजारों में लगातार आठ महीनों की तेजी बहुत कम बार देखने को मिली है और आमतौर पर इसके बाद बाजारों में सुधार और उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
नितेश चंद के अनुसार, जून 2026 के अंत तक सेंसेक्स 81,000 और निफ्टी 25,000 के स्तर तक रह सकता है। हालाँकि अगले 12 महीनों के लिए उनका नजरिया अपेक्षाकृत सतर्क है। दिसंबर 2026 तक वह सेंसेक्स को 80,000 और निफ्टी को 24,500 के आसपास देखते हैं।
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नितेश चंद के अनुमान |
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सेंसेक्स लक्ष्य (जून 2026) |
81,000 |
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निफ्टी लक्ष्य (जून 2026) |
25,000 |
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सेंसेक्स लक्ष्य (दिसंबर 2026) |
80,000 |
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निफ्टी लक्ष्य (दिसंबर 2026) |
24,500 |
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2025-26 में निफ्टी ईपीएस (रु.) |
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2026-27 में निफ्टी ईपीएस (रु.) |
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2025-26 की दूसरी छमाही में कॉर्पोरेट आय वृद्धि |
0-10% |
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2025-26 में जीडीपी वृद्धि |
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2026-27 में जीडीपी वृद्धि |
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अगले 6 माह में डॉलर-रुपया विनिमय दर |
88-91 |
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अमेरिका से ट्रेड डील कब तक |
मार्च 2026 |
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सेंसेक्स 1 लाख पर किस वर्ष तक पहुँचेगा |
2027 |
चंद मौजूदा समय में भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक कारक महँगाई और कच्चे माल, विशेष रूप से धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद कंपनियों की स्थिर आय को मानते हैं। वहीं, लगातार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली को वे बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता बताते हैं।
वैश्विक बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार को लेकर उनका मानना है कि अगले 12 महीनों में भारतीय बाजारों की चाल वैश्विक बाजारों के अनुरूप ही रह सकती है। उनका मानना है कि आने वाले छह महीनों में बाजार की दिशा तय करने में तिमाही नतीजे सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। अमेरिका द्वारा लगाये गये शुल्कों का असर वह भारतीय बाजार पर सीमित मानते हैं और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मार्च 2026 तक पूरा होने की संभावना जताते हैं। आगामी आम बजट 2026-27 से उनकी प्रमुख अपेक्षा बुनियादी ढाँचे पर खर्च बढ़ाने और मुफ्त योजनाओं में कटौती की है। हालाँकि उन्हें लगता है कि बजट का बाजार पर प्रभाव सीमित रहेगा।
ब्याज दरों को लेकर उनका मानना है कि फिलहाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व और भारतीय रिजर्व बैंक की नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता। निजी पूँजीगत व्यय की बहाली सरकार के बुनियादी ढाँचा खर्च बढ़ाने पर निर्भर करेगी। वैश्विक स्तर पर आने वाले महीनों में अमेरिकी बाजारों की चाल घरेलू बाजारों पर सबसे अधिक असर डाल सकती है। विदेशी निवेश प्रवाह को लेकर वह कहते हैं कि जब तक कंपनियों की आय में ठोस सुधार नहीं दिखता, तब तक बिकवाली का दबाव बना रह सकता है।
अगले 1 साल में पसंद क्षेत्र/शेयर
तेजी वाले क्षेत्र : एफएमसीजी, बैंकिंग और आईटी
कमजोर क्षेत्र : फार्मा और सार्वजनिक उपक्रम
5 पसंदीदा शेयर : नेस्ले, टीसीएस, आरबीएल बैंक और नायका
(शेयर मंथन, 21 जनवरी 2026)