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एक्सपर्ट से जानें सोना और चाँदी की कीमतों में फिलहाल नरमी क्यों आई है?

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोना और चाँदी फिलहाल दबाव में नजर आ रहे हैं। हाल के दिनों में कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिली है, जो मुख्य रूप से प्रॉफिट बुकिंग और निवेशकों की रणनीति में बदलाव का संकेत देती है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि आम धारणा यह होती है कि सोने की कीमतों में बड़ी तेजी से सभी निवेशकों को लाभ होता है, लेकिन वास्तविकता में केवल सीमित निवेशक ही लंबे समय तक होल्ड कर पाते हैं। अधिकांश लोग बीच-बीच में खरीद-बिक्री करते रहते हैं, जिससे उनका औसत लागत स्तर भी बढ़ जाता है और बड़े मुनाफे का लाभ सीमित हो जाता है।

वर्तमान परिस्थिति में सोना और चांदी की चाल को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि बाजार की दिशा इस समय मुख्य रूप से कच्चे तेल और जियोपॉलिटिकल तनाव से तय हो रही है। यह अनिश्चितता सीधे तौर पर तेल बाजार से जुड़ी है, इसलिए इसका असर सोने-चांदी पर सीमित दिखाई दे रहा है। यदि यह संकट ब्याज दरों या व्यापारिक टैरिफ से जुड़ा होता, तो सोने और चांदी में तेज उछाल देखने को मिल सकता था। यही कारण है कि फिलहाल इन धातुओं में बड़ी तेजी नहीं दिख रही है और ये एक सीमित दायरे में कंसोलिडेशन कर रही हैं।

सोने और चाँदी की वैल्यूएशन करना स्वाभाविक रूप से कठिन होता है, क्योंकि ये एसेट किसी कंपनी की तरह कमाई (earnings) नहीं करते। इनकी कीमत मुख्यतः उत्पादन लागत और निवेशकों की मांग-आपूर्ति पर आधारित होती है। इसलिए इन्हें एक “सेफ हेवन” या जोखिम से बचाव (hedge) के रूप में देखा जाता है। निवेश के लिहाज से विशेषज्ञों का मानना है कि पोर्टफोलियो में 5 से 7% तक सोना रखना सामान्य स्थिति में उचित होता है, जबकि वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए इसे 10% तक बढ़ाया जा सकता है।

तकनीकी दृष्टिकोण से सोने में फिलहाल एक बड़ा रेंज देखने को मिल रहा है। जब तक कीमत 5250 डॉलर के ऊपर मजबूती से नहीं टिकती, तब तक इसे पॉजिटिव ट्रेंड में नहीं माना जाएगा। वहीं नीचे की ओर 4500 डॉलर के आसपास का स्तर निवेश के लिए बेहतर जोखिम-रिवार्ड प्रदान कर सकता है। इसी तरह चांदी में भी 70 से 97 डॉलर का एक व्यापक दायरा बनता दिख रहा है, जिसमें यह लंबे समय तक कंसोलिडेट कर सकती है।

ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए चांदी में “सेल ऑन राइज” की रणनीति कारगर हो सकती है, जहां हर उछाल पर बिकवाली की जा सकती है और हाल के लोअर हाई को स्टॉप लॉस के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं सोने में भी ऊपरी स्तरों पर सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि उच्च कीमतों पर जोखिम-रिवार्ड अनुपात कमजोर होता जाता है।

कुल मिलाकर, मौजूदा समय में सोना और चांदी तेजी के बजाय स्थिरता और हल्की गिरावट के दौर में हैं। निवेशकों को इसमें आक्रामक दांव लगाने के बजाय संतुलित एसेट एलोकेशन और धैर्य के साथ रणनीति बनानी चाहिए, क्योंकि आगे की दिशा काफी हद तक वैश्विक हालात और खासकर तेल बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगी।


(शेयर मंथन, 17 मार्च 2026)

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