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आईटी सेक्टर पर डर हावी, विजय चोपड़ा से जानें ऐसे में निवेशकों को क्या करना चाहिए?

आईटी सेक्टर को लेकर इस समय निवेशकों के मन में गहरी चिंता और अनिश्चितता देखने को मिल रही है। एक तरफ वैश्विक तनाव, जियोपॉलिटिकल परिस्थितियां और वीजा से जुड़ी सख्त नीतियां कंपनियों की लागत बढ़ा रही हैं।

मार्केट एक्सपर्ट विजय चोपड़ा का कहना है कि दूसरी ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेज़ी से बढ़ता प्रभाव पूरे सेक्टर के बिज़नेस मॉडल को बदल रहा है। जिन कंपनियों का कारोबार पहले बड़े स्तर पर मानव संसाधन यानी प्रोग्रामर्स और इंजीनियर्स पर निर्भर था, अब वही काम AI आधारित सिस्टम और ऑटोमेशन के जरिए तेजी और कम लागत में हो रहा है। उदाहरण के तौर पर, अकाउंटिंग, जीएसटी और टीडीएस रिकंसिलिएशन जैसे जटिल कार्य अब एजेंटिक AI के जरिए मिनटों में पूरे हो जाते हैं, जहां पहले बड़ी टीमों की जरूरत होती थी।

यह बदलाव ठीक उसी तरह का है जैसा Y2K के समय टेक्नोलॉजी में बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन देखा गया था, लेकिन इस बार असर और भी व्यापक है। आज AI टूल्स पूरे-के-पूरे प्रोग्राम लिखने में सक्षम हो चुके हैं, जिससे पारंपरिक आईटी सर्विस कंपनियों के लिए चुनौती बढ़ गई है। इसका सीधा असर उनकी लागत संरचना और रोजगार पर भी पड़ा है, जहां कई कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या में कटौती की है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि आईटी कंपनियों का भविष्य खत्म हो रहा है, बल्कि वे एक नए दौर में प्रवेश कर रही हैं जहां उन्हें खुद को दोबारा गढ़ना (reinvent) होगा।

भारतीय आईटी कंपनियां लंबे समय से सर्विस-आधारित मॉडल पर काम करती आई हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि वे प्रोडक्ट-आधारित अप्रोच अपनाएं। वैश्विक स्तर पर OpenAI का ChatGPT और Anthropic का Claude जैसे प्रोडक्ट्स इस बदलाव के उदाहरण हैं। भारत में अभी तक इस स्तर के मजबूत AI प्रोडक्ट्स की कमी दिखती है, हालांकि प्रयास जरूर हो रहे हैं। अगर भारतीय कंपनियां अपनी सोच बदलकर इनोवेशन और प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर फोकस करती हैं, तो आने वाले वर्षों में वे वैश्विक बाजार में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

निवेश के नजरिए से देखें तो आईटी शेयरों में पिछले समय में भारी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों में निराशा बढ़ी है। लेकिन अक्सर बाजार में सबसे ज्यादा निराशा के समय ही नए अवसर पैदा होते हैं। कई बड़ी कंपनियां पहले ही AI के साथ साझेदारी कर रही हैं और अपनी लागत को ऑप्टिमाइज़ कर रही हैं। आने वाले 6 महीने से 1 साल में इनके नए प्रोडक्ट्स और स्ट्रेटेजी का असर दिख सकता है।

इसलिए, जिन निवेशकों ने आईटी शेयर ऊंचे स्तर पर खरीदे हैं, उनके लिए घबराने के बजाय धैर्य रखना जरूरी है। यह सेक्टर फिलहाल ट्रांसफॉर्मेशन फेज में है, और अगर कंपनियां सही दिशा में कदम उठाती हैं, तो आने वाले 4–5 वर्षों में यह सेक्टर फिर से मजबूत वापसी कर सकता है।


(शेयर मंथन, 20 मार्च 2026)

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