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GSP क्रॉप साइंस का आईपीओ 18 मार्च तक खुला रहेगा, कंपनी ने बतायी ग्रोथ की रणनीति

कृषि क्षेत्र से जुड़ी कंपनी GSP क्रॉप साइंस का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) 16 से 18 मार्च के बीच निवेशकों के लिए खुलेगा। कंपनी ने अपने आईपीओ के लिए 304 से 320 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है।

कुल मिलाकर यह इश्यू करीब 400 करोड़ रुपये का है, जिसमें लगभग 240 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू शामिल है, जबकि बाकी हिस्सा ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में होगा। कंपनी इस आईपीओ के जरिए जुटाई गई राशि का उपयोग मुख्य रूप से कर्ज कम करने और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों को पूरा करने के लिए करेगी। कंपनी के सीएमडी भवेश शाह के मुताबिक, कंपनी की शुरुआत वर्ष 1985 में उनके पिता ने की थी और शुरुआत से ही फोकस टेक्निकल मैन्युफैक्चरिंग पर रहा है। वर्तमान में कंपनी के पास पांच मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जिनमें से दो प्लांट में टेक्निकल प्रोडक्ट और एक में इंटरमीडिएट का उत्पादन होता है। कंपनी की रणनीति उन कृषि रसायनों के टेक्निकल प्रोडक्ट्स को भारत में बनाना रही है जो पहले आयात किए जाते थे। पिछले 15 वर्षों में कंपनी ने करीब 10 नए टेक्निकल प्रोडक्ट विकसित किए हैं और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के जरिए ऑफ-पेटेंट प्रोडक्ट्स को इनोवेटिव प्रोसेस के साथ भारत में पहली बार मैन्युफैक्चर करने पर जोर दिया है।

कंपनी ने पिछले तीन वर्षों में कई पेटेंटेड कॉम्बिनेशन प्रोडक्ट लॉन्च किए हैं, जिससे उसकी मौजूदगी धान, सब्जियों, मक्का और कपास जैसी फसलों में मजबूत हुई है। कंपनी के पास फिलहाल 102 पेटेंटेड प्रोडक्ट हैं और 108 के लिए आवेदन किया जा चुका है, जिनमें से 12 प्रोडक्ट बाजार में लॉन्च भी किए जा चुके हैं। कंपनी का कहना है कि आने वाले समय में भी पेटेंट खत्म होने वाले प्रोडक्ट्स और नए कॉम्बिनेशन प्रोडक्ट्स के जरिए अपनी प्रोडक्ट रेंज को मजबूत किया जाएगा।

भौगोलिक विस्तार की बात करें तो कंपनी भारत के 20 से ज्यादा राज्यों में काम कर रही है और जल्द ही बाकी राज्यों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजना है। घरेलू बाजार में कंपनी का खास फोकस धान और मक्का की फसलों पर है, क्योंकि भारत में कृषि रसायनों की खपत का बड़ा हिस्सा इन फसलों में होता है। खासकर मक्का की मांग इथेनॉल उत्पादन बढ़ने के कारण तेजी से बढ़ रही है।

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने बताया कि पिछले वर्षों में प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव और पेटेंटेड कॉम्बिनेशन प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी बढ़ने से मार्जिन में सुधार हुआ है। भले ही कुछ समय में कीमतों में गिरावट के कारण राजस्व वृद्धि सीमित रही हो, लेकिन बेहतर मार्जिन के कारण मुनाफे में मजबूत बढ़त देखने को मिली है। कंपनी के मुताबिक, यही रणनीति आगे भी जारी रहेगी ताकि लाभप्रदता को स्थिर रखा जा सके। आईपीओ से मिलने वाली राशि में से लगभग 170 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनी अपने कर्ज को चुकाने के लिए करेगी। फिलहाल कंपनी की बैलेंस शीट पर करीब 321 करोड़ रुपये का कर्ज है, जिसे कम कर कंपनी अपने व्यवसाय को अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाना चाहती है। बाकी रकम का उपयोग कंपनी सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों और रजिस्ट्रेशन जैसी प्रक्रियाओं में करेगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कंपनी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। फिलहाल कंपनी करीब 37 देशों में निर्यात करती है, जिसमें अमेरिका और ब्राजील उसके प्रमुख बाजार हैं। कंपनी का कहना है कि इन देशों में कृषि रसायनों की मांग अधिक है और भारत के कृषि सीजन खत्म होने के बाद वहां का सीजन शुरू हो जाता है, जिससे उत्पादन क्षमता का साल भर बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

राजस्व के लिहाज से फिलहाल कंपनी का करीब 80% कारोबार घरेलू बाजार से और 20% निर्यात से आता है। हालांकि कंपनी का लक्ष्य अगले पांच से आठ वर्षों में निर्यात का हिस्सा बढ़ाकर करीब 40% तक पहुंचाने का है। कंपनी का मानना है कि ब्राजील और अमेरिका में प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आने वाले वर्षों में वहाँ से अच्छी ग्रोथ मिल सकती है।

वैल्यूएशन की बात करें तो कंपनी का कहना है कि आईपीओ की कीमत मौजूदा बाजार परिस्थितियों और उद्योग की अन्य कंपनियों के आधार पर तय की गई है। कंपनी का पी/ई मल्टीपल इंडस्ट्री औसत की तुलना में कम रखा गया है, ताकि मध्यम और लंबी अवधि के निवेशकों को आकर्षक वैल्यूएशन मिल सके और भविष्य में बेहतर रिटर्न की संभावना बन सके।


(शेयर मंथन, 16 मार्च 2026)

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