लेटेंट व्यू एनालिटिक्स को लेकर निवेशकों के बीच फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि आने वाले समय में शेयर की चाल कैसी रह सकती है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि केवल एक साल के नजरिए से इस शेयर को देखने के बजाय इसके चार्ट पैटर्न और प्रमुख सपोर्ट-रेजिस्टेंस स्तरों पर ध्यान देना अधिक जरूरी है। हाल के समय में शेयर ने अपना ऑल-टाइम लो तोड़ा और उसके नीचे नया निचला स्तर बनाया, जो तकनीकी रूप से कमजोरी का संकेत माना जाता है। ऐसे में शेयर में जोखिम पहले की तुलना में बढ़ गया है।
हालांकि, बड़ी गिरावट के बाद शॉर्ट कवरिंग के चलते शेयर में रिकवरी या थ्रोबैक देखने को मिल सकता है। चार्ट पर दो प्रमुख ब्रेकडाउन स्तर दिखाई देते हैं। पहला 340 रुपये के आसपास और दूसरा 300 रुपये के स्तर पर। हालिया तेजी के दौरान 340 रुपये के पास शेयर को मजबूत रेजिस्टेंस मिला और वहीं से दबाव देखने को मिला। यदि सेक्टर में दोबारा खरीदारी का माहौल बनता है तो शेयर 340 रुपये के ऊपर निकलकर 375 रुपये तक पहुंचने की कोशिश कर सकता है, लेकिन यह स्तर भी एक अहम निर्णय बिंदु रहेगा।
तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि यदि शेयर 370-375 रुपये के दायरे तक पहुंचता है तो निवेशकों को 'हायर लो' पैटर्न पर नजर रखनी चाहिए। यानी हर नई तेजी के बाद बनने वाले ऊंचे निचले स्तर (Higher Low) को जोखिम प्रबंधन का आधार बनाना चाहिए। फिलहाल 29 जून की कैंडल का 262 रुपये का स्तर महत्वपूर्ण रिस्क मैनेजमेंट जोन माना जा सकता है। भविष्य में यदि शेयर कोई नया राउंडिंग बॉटम बनाता है तो वह स्तर नया सपोर्ट और जोखिम प्रबंधन का आधार बन सकता है।
लेटेंट व्यू एनालिटिक्स में फिलहाल पूरी तरह तेजी की पुष्टि नहीं हुई है। जब तक शेयर 375 रुपये के ऊपर मजबूती के साथ क्लोज देना शुरू नहीं करता, तब तक इसमें सावधानी बरतना बेहतर माना जाएगा। इसलिए केवल समय अवधि के आधार पर निवेश का फैसला लेने के बजाय चार्ट के बदलते पैटर्न और प्रमुख तकनीकी स्तरों पर लगातार नजर रखना अधिक महत्वपूर्ण होगा।
(शेयर मंथन, 28 जुलाई 2026)
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