गिफ्ट सिटी यानी गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी को भारत के वित्तीय क्षेत्र को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म के तौर पर देखा जा रहा है।
बातचीत में इसे आसान भाषा में भारत के भीतर एक ऐसे फाइनेंशियल मार्केट के रूप में समझाया गया, जहां विदेशी बाजारों से जुड़े लेनदेन और निवेश की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां डॉलर में लेनदेन, वैश्विक स्तर के रेगुलेशन और अपेक्षाकृत आसान टैक्स व्यवस्था जैसी सुविधाओं के जरिए भारत को सिंगापुर और दुबई जैसे वैश्विक वित्तीय केंद्रों की तर्ज पर विकसित करने की कोशिश की जा रही है।
गिफ्ट सिटी की खासियत यह भी है कि भारतीय निवेशक को विदेश में निवेश करने के लिए जरूरी नहीं कि उसके पास अलग से डॉलर अकाउंट हो। बातचीत के अनुसार, भारतीय बैंक अकाउंट से संबंधित प्रक्रिया पूरी करके गिफ्ट सिटी के जरिए उपलब्ध फंड्स में निवेश किया जा सकता है। इसके अलावा, एनआरआई और विदेशी निवेशकों के लिए भी भारत की ग्रोथ स्टोरी में निवेश करने का रास्ता तैयार किया जा रहा है। इस तरह गिफ्ट सिटी भारत और वैश्विक निवेशकों के बीच एक पुल की भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
पीपीएफएस अल्टरनेट एसेट मैनेजर्स की ओर से गिफ्ट सिटी के माध्यम से ग्लोबल निवेश के लिए फंड ऑफ फंड्स की सुविधा भी पेश की गई है। बातचीत में बताया गया कि एसएंडपी 500 और नैस्डैक 100 से जुड़े फंड्स के जरिए निवेशकों को अमेरिकी बाजार में एक्सपोजर मिल सकता है। जून तक इन फंड्स में करीब 30 मिलियन का निवेश होने की जानकारी दी गई। हालांकि, फंड्स की शुरुआत हाल ही में हुई होने के कारण इतनी कम अवधि में उनके प्रदर्शन का आकलन करना जल्दबाजी माना गया।
ग्लोबल निवेश के मामले में बातचीत का मुख्य संदेश लंबी अवधि और डायवर्सिफिकेशन पर रहा। अमेरिकी बाजार में तेजी के दौरान निवेशकों में लालच और गिरावट की आशंका के कारण डर दोनों पैदा हो सकते हैं। ऐसे में रोजाना बाजार की चाल देखने के बजाय चार से पांच साल का नजरिया रखने पर जोर दिया गया। बातचीत में यह भी कहा गया कि ग्लोबल डायवर्सिफिकेशन कोई नया ट्रेंड नहीं है और पीपीएफएस लंबे समय से इसकी वकालत करता रहा है।
निवेशकों के लिए कुल पोर्टफोलियो का करीब 20–30 प्रतिशत हिस्सा ग्लोबल डायवर्सिफिकेशन में रखने का सुझाव दिया गया, हालांकि यह व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं है।
कुल मिलाकर, गिफ्ट सिटी को भारत के वित्तीय बाजार को दुनिया से जोड़ने वाली एक लंबी अवधि की पहल के रूप में देखा जा रहा है। बातचीत में यह माना गया कि अभी गिफ्ट सिटी में बहुत कुछ विकसित होना बाकी है, लेकिन इसकी दिशा और भविष्य की संभावनाएं मजबूत हैं। इसका उद्देश्य भारत को एक ऐसा वैश्विक वित्तीय केंद्र बनाना है जहां भारतीय और विदेशी दोनों निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए बेहतर विकल्प मिल सकें।
(शेयर मंथन, 12 अगस्त 2026)
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