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ललिता ज्वेलरी मार्ट का ₹1,700 करोड़ का आईपीओ: दक्षिण भारत के बाद देशभर में विस्तार की तैयारी

ललिता ज्वेलरी मार्ट अपना आईपीओ लेकर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है।

कंपनी का आईपीओ करीब 1,700 करोड़ रुपये का है, जिसमें ₹00 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल यानी OFS और 1,200 करोड़ रुपये की फ्रेश इक्विटी शामिल है। आईपीओ का प्राइस बैंड 190 से 201 रुपये प्रति शेयर रखा गया है और यह 17 अगस्त को खुलकर 19 अगस्त को बंद होगा। कंपनी की योजना आईपीओ से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से नए शोरूम खोलने और कारोबार के विस्तार में करने की है।

ललिता ज्वेलरी का इतिहास काफी पुराना है। कंपनी की शुरुआत 1985 में हुई थी और 1999 में किरण कुमार जैन ने इसे टेकओवर किया, जिसकी औपचारिक प्रक्रिया 2003 तक पूरी हुई। फिलहाल कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से दक्षिण भारत में केंद्रित है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और पुडुचेरी में कंपनी के शोरूम मौजूद हैं। प्रबंधन का मानना है कि दक्षिण भारत में अभी भी कंपनी के लिए विस्तार की काफी गुंजाइश है और आने वाले वर्षों में यहां बड़ी संख्या में नए शोरूम खोले जा सकते हैं।

कंपनी की खास रणनीति उसके प्राइसिंग मॉडल से जुड़ी है। ललिता ज्वेलरी का मुख्य फोकस प्लेन गोल्ड ज्वेलरी पर है। कंपनी के अनुसार उसकी बिक्री में करीब 92 प्रतिशत हिस्सा प्लेन गोल्ड ज्वेलरी का है, जबकि स्टोन और सिल्वर ज्वेलरी की हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत है। कंपनी का दावा है कि वह दूसरे ज्वेलर्स की तुलना में मेकिंग चार्ज और वेस्टेज को करीब 4-5 प्रतिशत कम रखती है। इसका उद्देश्य ग्राहकों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर ज्वेलरी उपलब्ध कराना है।

कम कीमत पर ज्वेलरी उपलब्ध कराने के पीछे कंपनी का इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग मॉडल भी महत्वपूर्ण है। प्रबंधन के मुताबिक करीब 85 प्रतिशत ज्वेलरी कंपनी खुद बनाती है और इसके लिए चेन्नई में दो फैक्ट्रियां हैं। बाकी करीब 15 प्रतिशत ज्वेलरी बाहर से खरीदी जाती है, ताकि बाजार में चल रहे नए डिजाइन और ट्रेंड की जानकारी भी मिलती रहे। कंपनी का कहना है कि इन-हाउस निर्माण से मिलने वाला होलसेल मार्जिन वह ग्राहकों तक पहुंचाती है, जिससे उसकी कीमत प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कम रखने में मदद मिलती है।

सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव ज्वेलरी कारोबार के लिए एक बड़ी चुनौती है। कंपनी के मुताबिक दक्षिण भारत में सोने को लेकर ग्राहकों का भरोसा मजबूत है और लोग अपनी बचत का एक हिस्सा गोल्ड में लगाना पसंद करते हैं। हालांकि, गोल्ड की कीमतों में बदलाव से इन्वेंटरी और मार्जिन पर असर पड़ सकता है। कंपनी ने बताया कि फिलहाल उसने गोल्ड की कीमतों को हेज नहीं किया है, लेकिन भविष्य में हेजिंग की योजना है, जिससे सोने की कीमतों में तेज बदलाव का असर कम किया जा सके।

कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में भी हाल के समय में सुधार देखने को मिला है। प्रबंधन के अनुसार 2025-26 में बिक्री बढ़कर करीब ₹25,000 करोड़ हो गई। गोल्ड की ऊंची कीमतों का भी कंपनी के वेस्टेज चार्ज पर असर पड़ा, क्योंकि सोने की कीमत बढ़ने के साथ वेस्टेज की वैल्यू भी बढ़ती है। इससे कंपनी के मार्जिन और मुनाफे में सुधार में मदद मिली। हालांकि, ज्वेलरी कारोबार में ऑपरेटिंग कैश फ्लो को समझने के लिए सामान्य कंपनियों से अलग नजरिया रखना पड़ता है, क्योंकि कंपनी को बिक्री के बाद लगातार गोल्ड खरीदना पड़ता है।

आईपीओ से मिलने वाली फ्रेश इक्विटी का इस्तेमाल कंपनी नए शोरूम खोलने में करेगी। कंपनी ने बताया कि चालू वर्ष में 10 नए शोरूम खोलने की योजना है, जिनमें से तीन पहले ही खोले जा चुके हैं और सात और खोले जाने हैं। अगले वर्ष भी 10 नए शोरूम खोलने की योजना है। कंपनी के अनुसार एक शोरूम में इन्वेंटरी के लिए करीब ₹100 करोड़ तक का निवेश हो सकता है। यानी विस्तार के साथ कंपनी की पूंजी की जरूरत भी काफी बढ़ सकती है।

वैल्यूएशन की बात करें तो कंपनी प्रबंधन का कहना है कि आईपीओ को प्रतिस्पर्धी ज्वेलरी कंपनियों की तुलना में कम वैल्यूएशन पर लाया जा रहा है। प्रबंधन के अनुसार कंपनी करीब ₹11,250 करोड़ के वैल्यूएशन पर आईपीओ ला रही है और उसका उद्देश्य यह है कि कंपनी में निवेश करने वाले निवेशकों को भी भविष्य में कमाई का अवसर मिले। हालांकि, किसी भी आईपीओ में निवेश से पहले केवल सस्ते वैल्यूएशन के आधार पर फैसला लेने के बजाय कंपनी की ग्रोथ, मार्जिन, कैश फ्लो, कर्ज, इन्वेंटरी और प्रतिस्पर्धा का भी विश्लेषण करना जरूरी होगा।

ललिता ज्वेलरी की आगे की रणनीति फिलहाल दक्षिण भारत में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने की है। कंपनी के मुताबिक मार्च के समय उसके करीब 61 शोरूम थे और दक्षिण भारत में अभी करीब 110 और शोरूम की संभावित गुंजाइश है। प्रबंधन अगले चार से पांच वर्षों तक दक्षिण भारत में विस्तार पर फोकस करना चाहता है। इसके बाद कंपनी उत्तर भारत में भी प्रवेश करने की योजना बना सकती है। इस तरह देखा जाए तो ललिता ज्वेलरी का आईपीओ सिर्फ पूंजी जुटाने की कवायद नहीं है, बल्कि दक्षिण भारत में मजबूत आधार के बाद देश के दूसरे हिस्सों में विस्तार की लंबी रणनीति का हिस्सा भी है।


(शेयर मंथन, 13 अगस्त 2026)

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