अधिक आयात के कारण कपास में सुस्ती का रुझान - एसएमसी

वर्ष 2018-19 (नवंबर-अक्टूबर) में कपास का उत्पादन शुरुआती अनुमान से कम होने और मौजूदा सीजन में आवक काफी कम लगभग 11.5 मिलियन बेल रहने के बावजूद कपास की कीमतों में तेजी का रुझान दर्ज नही किया जा सकता है।
एमसीएक्स में कॉटन वायदा (जनवरी) की कीमतों को 21,200 रुपये के स्तर पर बाधा रहने की संभावना है। इसका कारण यह है कि कपास का आयात रिकॉर्ड रुप से अधिक हुआ है।
भारतीय कपास निगम के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार इस वर्ष 2.7 मिलियन बेल कपास का आयात हुआ है, जबकि निर्यात पिछले वर्ष के 6.5 मिलियन बेल की तुलना में कम होकर 5.3 मिलियन बेल रह जाने की संभावना है। अमेरिकी सरकार की कार्यबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमतों में लगातार दूसरे हफ्ते गिरावट हुई है।
ग्वारसीड वायदा (फरवरी) की कीमतों के 4,340-4,440 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है, जबकि ग्वारगम वायदा (फरवरी) की कीमतों को 8,745 रुपये के नजदीक बाधा का सामना करना पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण अधिकांश स्टॉकिस्ट बाजार से दूरी बनाये हुए हैं। दूसरी ओर अमेरिका में शेल तेल उत्पादकों का मुनाफा कम होने के कारण उनके द्वारा पहले के अनुमान की तुलना में पिछले पाँच वर्षो में कम तेल का उत्पादन किये जाने से ग्वारगम के निर्यात को लेकर आशंका भी बढ़ी है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार तेल की खपत के बिना मौजूदा उत्पादन स्तर को बनाये रखना असंभव है। तेल की मांग में वृद्धि को पूरा करने के लिए ऑपरेटरों को अधिक ड्रिलिंग कार्य करना पड़ता है। फिर भी कुछ शेल ड्रिलर अभी भी तेल उत्पादन द्वारा मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन अक्टूबर के बाद से तेल की कीमतों में लगभग 40% की गिरावट के बाद से निवेश में कटौती करने को लेकर उन पर दबाव है। (शेयर मंथन, 07 जनवरी 2019)

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