कॉटन, ग्वारसीड और ग्वारगम में गिरावट की संभावना - एसएमसी

कॉटन वायदा (अप्रैल) की कीमतों में 21,800 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है।
सीमित आवक के कारण विदेशों से माँग कम हुई है, जिसके कारण 2018-19 में भारत से कपास का निर्यात 47 लाख बेल (1 बेल 170 किलो ग्राम) का होने का अनुमान है, जो 2009-10 के बाद सबसे कम है। घरेलू माँग कम है और आपूर्ति में कमी के साथ कीमतों में बढ़ोतरी के बाद तमिलनाडु की कपास मिलें आयात करने पर विवश हो सकती है।
दालों का अधिक आयात किये जाने के कारण चना वायदा (मई) की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है और कीमतों को 4,445 रुपये के स्तर पर बाधा का सामना करना पड़ सकता है। हाल ही में वाणिज्य मंत्रालय ने मौजूदा वित्त वर्ष में 2 लाख टन तूर दाल, 1.5 लाख टन उड़द दाल, 1.5 लाख टन मूंग दाल और 1.5 लाख टन मटर आयात करने की प्रक्रिया जारी कर दी है और मिलों से आवेदन मँगाना शुरू कर दिया है।
इस हफ्ते ग्वारसीड और ग्वारगम वायदा (मई) की कीमतों में गिरावट जारी रह सकती है और कीमतें क्रमशः 42,90-4,250 और 8,600-8,550 रुपये तक लुढ़क सकती है। मौसम विभाग के नवीनतम अनुमान के अनुसार इस वर्ष मार्च-मई के दौरान के एल्नीनो के विकसित होने की संभावना के कमजोर पड़ने से मॉनसून के सामान्य रहने की संभावना है और मॉनसून का वितरण पूरे देश होने की संभावना है, जो वर्षा पर आधरित ग्वार की खेती के काफी अनुकूल रहने की उम्मीद है। ऑस्ट्रेलियाई मौसम विभाग के अनुसार एल्नीनो अल्पकालिक और कमजोर रह सकता है, जो भारतीय मौसम विभाग के अनुमान का ही समर्थन कर रहा है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार हिंद महासागर के समुद्र तल का तापमान मॉनसून के सामान्य रहने के अनुकूल है। (शेयर मंथन, 24 अप्रैल 2019)

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