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2026-2028 के लिए भारतीय शेयर बाजार का रोडमैप क्या है, एक्सपर्ट से जानें दीर्घकालिक नजरिया

आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मौजूदा सुस्ती के बाद फिर से एक बड़ा मल्टी-ईयर बुल मार्केट देखने को मिलेगा।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि मौजूदा स्थिति में बाजार साल के अंत तक रेंज-बाउंड रह सकता है, क्योंकि कोई बहुत बड़ा तात्कालिक ट्रिगर नजर नहीं आता। लेकिन यह ठहराव दरअसल अगले बड़े मूवमेंट की तैयारी जैसा है। 2026 से 2028 के बीच बाजार के लिए एक मजबूत दीर्घकालिक रोडमैप बनता हुआ दिखता है। अनुमान यह है कि 2026 में निफ्टी एक नई रैली में प्रवेश कर सकता है, 2027 में तेजी की रफ्तार तेज होगी और 2028 में यह साइकिल अपने शिखर पर पहुंच सकती है। इस पूरे दौर में निफ्टी के 35,000 से 40,000 के दायरे तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। वहीं बैंक निफ्टी के लिए 2028 तक 85,000 या उससे ऊपर के स्तर भी असंभव नहीं माने जा रहे। यह संकेत देता है कि आने वाला चक्र सिर्फ सीमित तेजी नहीं बल्कि एक स्ट्रक्चरल बुल मार्केट हो सकता है। 

सेक्टर के नजरिए से देखें तो शुरुआत में लार्जकैप स्टॉक्स बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, खासकर BFSI यानी बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर। क्रेडिट ग्रोथ के 12–15% की सस्टेनेबल रेंज में जाने की उम्मीद है, जिसका सीधा फायदा बैंकों और फाइनेंशियल कंपनियों को मिलेगा। इसके बाद 2026 की दूसरी छमाही से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का दौर शुरू हो सकता है, जहां आउटपरफॉर्मेंस देखने को मिल सकती है। 

मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स भी इस रोडमैप के पक्ष में नजर आते हैं। सॉफ्ट इन्फ्लेशन, सॉफ्ट यील्ड और सॉफ्ट क्रूड ऑयल की स्थिति बाजार के लिए पॉजिटिव माहौल बनाती है। इसके साथ ही लिक्विडिटी क्रिएशन, संभावित रेट कट्स, टैक्स राहत और जीएसटी जैसे सुधार उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा दे सकते हैं। भारत की GDP में कंजम्पशन का हिस्सा करीब 56–57% है, इसलिए कंजम्पशन में सुधार सीधे बाजार की कमाई पर असर डालेगा। 

कॉर्पोरेट अर्निंग्स की बात करें तो मौजूदा समय में प्रॉफिट ग्रोथ भले ही 2-4% के आसपास रही हो, लेकिन आने वाले वर्षों में इसके 15–18% तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। जैसे-जैसे प्राइवेट कैपेक्स 2026 की दूसरी छमाही से रफ्तार पकड़ता है, वैसे-वैसे इंडस्ट्रियल्स, कैपेक्स और संबंधित सेक्टर्स में भी चुनिंदा मौके बन सकते हैं। हालांकि कैपेक्स थीम में पूरी तरह झुकने के बजाय संतुलित अप्रोच बेहतर मानी जा रही है।

वैल्यूएशन के नजरिए से बाजार बहुत ज्यादा महंगा नहीं कहा जा सकता। निफ्टी अपने 10-साल के मीडियन वैल्यूएशन के आसपास है, जबकि मिडकैप थोड़े ऊपर और स्मॉलकैप लगभग फेयर वैल्यू पर दिखते हैं। अगर निफ्टी 28,000 के ऊपर जाता है, तो बीच-बीच में 10% तक के करेक्शन आ सकते हैं, लेकिन इन्हें डरने की बजाय खरीदारी के मौके के रूप में देखना चाहिए। SIP जैसी रणनीतियाँ खासकर मिड और स्मॉलकैप में लंबे समय के लिए उपयोगी रह सकती हैं।

2026–2028 का समय भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद अहम हो सकता है। यह दौर धैर्य, अनुशासन और सही सेक्टर चयन की मांग करेगा। जो निवेशक शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव से घबराए बिना लंबी अवधि की सोच रखेंगे, उनके लिए यह मल्टी-ईयर बुल मार्केट वेल्थ क्रिएशन के मजबूत अवसर लेकर आ सकता है।


(शेयर मंथन, 03 जनवरी 2026)

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