शेयर मंथन में खोजें

कॉटन में हो सकती है बढ़त, चने में सीमित दायरे में कारोबार की संभावना - एसएमसी

चना वायदा (जून) कीमतों के 3,605-3,645 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
हाल के दिनों में चने की कीमतों में नरमी का रुझान रहा है, लेकिन अब यहाँ से कीमतों में अधिक गिरावट की संभावना नही है। किसान अपने उत्पादनों को फेड को 4,400 रुपये प्रति 100 किग्रा के न्यूनतम समर्थन मूल्य की दर से बेच रहे हैं, जबकि मौजूदा हाजिर कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी कम है। किसान निजी कारोबारियों को चना बेचने से परहेज कर रहे हैं।
कॉटन वायदा (मई) की कीमतों में 21,400-21,450 रुपये तक बढ़त होने की संभावना है। भारतीय कपास निगम द्वारा सितंबर तक समाप्त होने वाले मौजूदा फसल वर्ष में 1,00,000 बेल कपास का निर्यात किये जाने की संभावना से हाजिर बाजारों में कपास की कीमतों को मदद मिल सकती है। रुपये के कमजोर होने और घरेलू बाजार में कपास की कम कीमतों के कारण विदेशी बाजारों से भारतीय कपास की मांग में बढ़ोतरी हो सकती है। घरेलू बाजार में कम होते स्टॉक और अधिक माँग के कारण कपास की कीमतों में तेजी का रुझान है। भारतीय कपास निगम के अनुसार 18 मई तक देश भर में 315.47 लाख बेल कपास की आवक हुई है जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 309.40 लाख बेल की तुलना में केवल 2% अधिक है। 377 लाख बेल के उत्पादन अनुमान को देखते हुए केवल 61.53 लाख बेल ही कपास बचा हुआ है।
ग्वारसीड वायदा (जून) की कीमतों के 3,820-3,870 रुपये के दायरे में साइडवेज कारोबार करने की संभावना है और ग्वारगम वायदा (जून) की कीमतों के 8,200-8,300 रुपये के दायरे में साइडवेज कारोबार करने की संभावना है। ग्वार समूह में सुस्त कारोबार हो रहा है, मौजूदा सीजन में सामान्य मॉनसून के अनुमान के कारण बाजार से दूरी बनाये हुए है। (शेयर मंथन, 25 मई 2018)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख