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गिरावट होने पर मेंथा ऑयल में हो सकती है खरीदारी, कॉटन में नरमी का रुझान - एसएमसी

मेंथा ऑयल वायदा (सितंबर) की कीमतों में गिरावट का इस्तेमाल खरीदारी के अवसर के रूप में किया जा सकता है।
इसकी कीमतों को 1,670 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता हैं। उतर प्रदेश के हाजिर बाजारों में किसान और स्टॉकिस्ट कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद से अपने स्टॉक को रोक कर रखे हुए हैं और धीरे-धीरे बाजार में छोड़ रहे हैं। दूसरी ओर वर्तमान समय में निर्यात माँग औसत है, लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपये के अब तक के निचले स्तर पर पहुँचने के कारण मेंथा ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद हैं।
एमसीएक्स में कॉटन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में नरमी बरकरार रह सकती है और कीमतें 22,500 रुपये तक लुढ़क सकती हैं। इसका कारण यह है कि उतर भारत में नयी कपास की आवक अगले दो हफ्ते में शुरू हो जायेगी, जिससे कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। कारोबारी नयी फसल की आवक में तेजी का इंतजार कर रहे हैं। कुछ छोटे क्षेत्रों में धीरे-धीरे कपास की फसल कटाई शुरू हो गयी है, लेकिन बेहतर क्वालिटी की आपूर्ति के इस महीने के अंत तक शुरू होने की संभावना है। महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में गुलाबी कीटों के प्रकोप देखे जा रहे हैं।
चना वायदा (सितंबर) की कीमतों के 3,940-3,970 रुपये तक बढ़त दर्ज करने की संभावना है। दिल्ली के बाजार में देशी चना की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जबकि राजस्थान और मध्य प्रदेश में चना की कीमतें 25 रुपये की बढ़ोतरी के साथ क्रमशः 4,175-4,200 रुपये और 4,075-4,100 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में पहुँच गयी हैं।
ग्वारसीड वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के 4,285-4,385 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है। कारोबारी मौसम की स्थिति पर नजर रखे हुए है। राजस्थान में ग्वारसीड की फसल कुल मिला कर अच्छी है और कुछ स्थानों में उत्पादकता में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। (शेयर मंथन, 05 सितंबर 2018)

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