शेयर मंथन में खोजें

ग्वारगम के लिए बाधा, चने में नरमी का रुझान - एसएमसी

कॉटन वायदा (दिसंबर) की कीमतों के 21,300-21,700 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
मिलों की ओर से कम खरीदारी के कारण दक्षिण और मध्य भारत में कपास की कीमतों में गिरावट हुई है। केवल जरूरतमंद मिलें ही कपास की खरीदारी कर रही है, जबकि विदेशों से औसत माँग को देखते हुए निर्यातक कोई बड़ा करार नही कर रहे हैं और वे थोक खरीदारी से दूरी बनाये हुए हैं।
ग्वारसीड वायदा (जनवरी) की कीमतों के 4,250-4,350 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है, जबकि ग्वारगम वायदा (जनवरी) में शॉर्ट कवरिंग (जवाबी खरीद) को 8,700 रुपये के नजदीक बाधा का सामना करना पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के रुझान के बाद पेराई मिलों की ओर से कमजोर माँग के कारण राजस्थान के प्रमुख बाजारों में ग्वारसीड और ग्वारगम की कीमतों में गिरावट हुई है।
चना वायदा (जनवरी) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ 4,410 रुपये के स्तर पर पहुँचने की संभावना है। चना दाल और बेसन की कम बिक्री के बाद मिलों की ओर से चना की कम खरीदारी के कारण कल देश के प्रमुख हाजिर बाजारों में चना की कीमतों में नरमी का रुझान है। सुस्त कारोबार के कारण काबुली चना की कीमतें 50 रुपये की गिरावट के साथ 4,250 रुपये प्रति 100 किलो ग्राम हो गयी हैं। विभिन्न क्षेत्रों से चना की अधिक आपूर्ति के कारण कीमतों में नरमी का रुझान है। (शेयर मंथन, 20 दिसंबर 2018)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख