शेयर मंथन में खोजें

कॉटन और ग्वारसीड में सुस्ती के संकेत - एसएमसी

कॉटन वायदा (जनवरी) की कीमतें 20,700-21,300 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
विश्व में सुस्ती के साथ कारोबार के साथ ही मिलों और निर्यातकों की ओर से कम खरीदारी के कारण दक्षिण और मध्य भारत में कपास की कीमतों में गिरावट हुई है। केवल जरूरतमंद मिलें ही कपास की खरीदारी कर रही है और कीमतों में गिरावट की उम्मीद से वे खरीदारी से दूरी बनाये हुए हैं। अधिक आवक के कारण विक्रेता मौजूदा कीमतों पर बेचना नही चाहते हैं, क्योंकि मौजूदा कीमतें लाभकारी नही हैं। अमेरिकी बाजार में शॉर्ट कवरिंग (जवाबी खरीद) के कारण कपास की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। अमेरिकी सरकार की आंशिक कार्यबंदी की आशंका से कीमतों पर दबाव पड़ रहा है।
ग्वारसीड वायदा (जनवरी) की कीमतों के 4,160-4,330 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं, जबकि ग्वारगम वायदा (जनवरी) की कीमतों को 8,200 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता हैं। कच्चे तेल की कीमतों में रिकवरी होने से कीमतों की गिरावट पर रोक लगी है। कल ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में 17 महीने के निचले स्तर से उछाल दर्ज की गयी है। रूस के ऊर्जा मंत्री के बयान से भी तेल की कीमतों को मदद मिली।
चना वायदा (जनवरी) की कीमतों में 4,450 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ नरमी का रुझान रह सकता है। चना दाल और बेसन की कम बिक्री के बाद मिलों की ओर से चना की कम खरीदारी के कारण कल देश के प्रमुख हाजिर बाजारों में चना की कीमतों में नरमी का रुझान है। नाफेड द्वारा खरीदे गये स्टॉक की मौजूदा कीमतों पर बिक्री से कीमतों पर दबाव पड़ रहा है। (शेयर मंथन, 27 दिसंबर 2018)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख