शेयर मंथन में खोजें

कपास और कॉटन ऑयल में तेजी का रुझान - एसएमसी

कपास वायदा (जुलाई) की कीमतों में 21,350 रुपये तक बढ़त दर्ज किये जाने की संभावना है।

भारतीय कपास निगम ने मौजूदा नीलामी में कम कीमतों पर कपास नहीं बेचने का फैसला किया है, जबकि कपास सीजन की समाप्ति के नजदीक आते जाने के साथ ही अच्छी क्वालिटी के कपास की कमी से खरीदार रुचि ले रहे हैं। अप्रैल के बाद से हुए नीलामी ने एजेंसी ने 2,00,000 बेल कपास की बिक्री 47,000-49,000 रुपये प्रति कैंडी की दर से की है। निगम ने 2018-19 में 11 लाख बेल कपास की खरीदारी की है, जिसमें 9,00,000 बेल कपास प्रीमियम क्वालिटी का है, जिसे रोक कर रखे हुए हैं।
कॉटन ऑयल सीड केक वायदा (अगस्त) की कीमतों में तेजी का रुझान रह सकता है और कीमतें 3,200 रुपये के स्तर पर पहुँच सकती हैं। गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में सूखे जैसी स्थिति के कारण पिछले दो वर्षो तक कपास का उत्पादन प्रभावित हुआ है। भारतीय कपास संगठन ने पिछले 10 वर्षों में कपास की उत्पादकता सबसे कम 420 किलोग्राम रहने के अनुमान के बाद कुल उत्पादन अनुमान में कमी की है। संगठन ने मौजूदा सीजन में 3.12 करोड़ बेल कपास उत्पादन का अनुमान लगाया है, जबकि पिछले सीजन में 3.65 करोड़ बेल कपास उत्पादन का अनुमान लगाया था।
कैस्टरसीड वायदा (अगस्त) की कीमतें यदि 5,500 रुपये से नीचे टूटती हैं तो कीमतों में 5,450-5,400 रुपये तक गिरावट हो सकती है। कमजोर माँग के कारण कीमतों पर दबाव पड़ रहा है। साल्वेंट एक्सटैंक्टर एसोसिएशन के अनुसार जून महीने में भारत से कैस्टर तेल का निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में 1% कम होकर 50,577 टन रह गया है। चीन की ओर से माँग में कमी के कारण निर्यात कम हुआ है। अप्रैल से शुरू मौजूदा वित्त वर्ष के पहले तीन महीने में कुल निर्यात 1,39,336 टन हुआ है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 1,72,777 टन हुआ था। (शेयर मंथन, 26 जुलाई 2019)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख