शेयर मंथन में खोजें

सोयाबीन में थमी रह सकती है बढ़त, सरसों में रुझान नरम - एसएमसी

सोयाबीन वायदा (सितंबर) में शॉर्ट कवरिंग (जवाबी खरीद) को 3,620 रुपये के स्तर पर बाधा का सामना करना पड़ सकता है और बढ़त पर रोक लगी रह सकती है।

हाल ही में सोपा ने तीन प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के 41 जिलों का सर्वे कराया है। सर्वे के अनुसार मध्य प्रदेश और राजस्थान के जिलों में सोयाबीन की फसल कुल मिलाकर बेहतर स्थिति में है। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्रों में भी सोयाबीन की फसल की स्थिति अच्छी है। लेकिन मराठवाड़ा में देर से हुई बुआई के कारण फसल अभी शुरुआती अवस्था में है।
सरसों वायदा (सितंबर) की कीमतें नरमी के रुझान के साथ 3,895-3,920 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार कर सकती हैं। स्थानीय पेराई मिलों की ओर से माँग में बढ़ोतरी के कारण हाजिर कीमतों में मजबूती देखी जा रही है। आने वाले दिनों में, तेल मिलों और सरसोंमील निर्यातकों की ओर से माँग बढ़ने की उम्मीद है।
सोया तेल वायदा (सितंबर) की कीमतों में 744 रुपये तक बढ़त दर्ज कर सकती है जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के रुझान पर सीपीओ वायदा (अगस्त) की कीमतों में 536-538 रुपये तक बढ़त दर्ज की जा सकती है। सीबोट में सोया तेल वायदा की कीमतों में 0.49 से 0.89 सेंट की बढ़त दर्ज की गयी है। इंडोनेशिया में सूखे मौसम के बाद उत्पादन प्रभावित होने के कारण मलेशियन पॉम ऑयल की कीमतें 10 महीने के उच्च स्तर पर पहुँच गयी है। मलेशियन पॉम ऑयल अक्टूबर डिलीवरी की कीमतें 1.5% की उछाल के साथ 2,135 रिंगिट (मलेशियन मुद्रा) हो गयी है। डेलियन एक्सचेंज में सोया तेल की कीमतों में 2.3% और पॉम ऑयल सितंबर वायदा की कीमतों में 0.7% की बढ़त दर्ज की गयी है। (शेयर मंथन, 09 अगस्त 2019)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख