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सर्राफा

सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 45,000 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 44,500 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी (मई) की कीमतों में काफी अधिक उठापटक हो सकती है और कीमतों में 67,900 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 66,800 रुपये पर सहारा रह सकता है।

डॉलर के मजबूती से सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 45,000 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 44,300 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी (मई) की कीमतों में काफी अधिक उठापटक हो सकती है और कीमतों में 67,500 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 66,200 रुपये पर सहारा रह सकता है।

सर्राफा बाजार में गिरावट की संभावना  - एसएमसी साप्ताहिक रिपोर्ट

फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल द्वारा डॉलर और बॉन्ड की बढ़ती यील्ड के बारे में अपने दृष्टिकोण से निवेशकों को निराश करने के कारण से सोने की कीमतें लगातार तीसरी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ गयी।

सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान - एसएमसी

सोने की कीमतों को 44,900 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 44,400 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी (मई) की कीमतों में काफी अधिक उठापटक हो सकती है और कीमतों में 66,700 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 65,400 रुपये पर सहारा रह सकता है।

सर्राफा बाजार में गिरावट की संभावना - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 44,800 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 44,100 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी (मई) की कीमतों में काफी अधिक उठापटक हो सकती है और कीमतों में 66,200 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 65,100 रुपये पर सहारा रह सकता है।

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    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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