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ईयू-भारत एफटीए के बीच वाइन इंडस्ट्री पर नजर, निवेशकों को सुला वाइनयार्ड्स शेयरों में क्या करना चाहिए?

संकल्प पटल जानना चाहते हैं कि उन्हें सुला वाइनयार्ड्स (Sula vineyards) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? उनके पास करीब 5,800 शेयर हैं, औसत खरीद भाव 200 रुपये है और निवेश का नजरिया लगभग दो साल का है। आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि यूरोपियन यूनियन–भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (EU-India FTA) के संदर्भ में वाइन इंडस्ट्री एक बार फिर निवेशकों के रडार पर है। मौजूदा स्तरों पर देखें तो अगर कंपनी के नतीजे इसी तरह स्थिर रहते हैं, तो वैल्यूएशन बहुत ज्यादा महंगा नहीं कहा जा सकता। यानी नीचे की तरफ बहुत बड़ा जोखिम फिलहाल नहीं दिखता, लेकिन ऊपर की तरफ तेज रफ्तार की उम्मीद भी अभी कमजोर नजर आती है। 

इस नजरिए से देखा जाए तो सुला जैसी कंपनियों पर EU-India FTA का तुरंत नकारात्मक असर पड़ने की आशंका कम है। घरेलू वाइन इंडस्ट्री को बचाने का प्रयास सरकार करेगी, खासकर तब जब महाराष्ट्र सरकार खुद वाइन टूरिज्म और वाइनरी सेक्टर को प्रमोट कर रही है। अगर ऐसा सपोर्ट न होता, तो पिछले कुछ सालों में सुला की हालत और कमजोर हो सकती थी। इस लिहाज से कंपनी अभी भी खुद को संभालने की स्थिति में है और सुधार की गुंजाइश मौजूद है।

हालांकि असली समस्या कंपनी के स्टैग्नेंट नंबर्स हैं। पिछले दो सालों से बिक्री और मुनाफे में कोई ठोस ग्रोथ नहीं दिख रही है। यही वजह है कि शेयर पर दबाव बना हुआ है। एक समय कंपनी को शुरुआती सफलता सिर चढ़कर बोलने लगी और वह अपने कोर बिजनेस से हटकर कई दूसरी गतिविधियों में फैल गई। इस डिफोकस का असर यह हुआ कि ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ गई। जब एक बार गाड़ी रुक जाती है, तो उसे दोबारा तेज करना काफी वक्त लेता है।

अब मैनेजमेंट फिर से ट्रैक पर लौटने की कोशिश कर रहा है। फोकस दोबारा प्रीमियम वाइन और वाइन टूरिज्म पर लाया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में वाइन टूरिज्म का योगदान रेवेन्यू में 20–25% तक पहुंच सकता है। मार्जिन्स के बारे में भी संकेत हैं कि वे अब बॉटम-आउट कर चुके हैं और आगे ज्यादा खराब होने की संभावना कम है। लेकिन बाजार अब सिर्फ कहानियों से संतुष्ट नहीं है, उसे ठोस नंबर्स चाहिए।

निवेशकों के लिए अगला बड़ा संकेत दिसंबर तिमाही के नतीजे होंगे। पिछले कुछ क्वार्टर से मैनेजमेंट बेहतर भविष्य की बात कर रहा है, लेकिन उसका असर आंकड़ों में साफ नहीं दिखा है। अगर आने वाले नतीजों में वाकई सुधार नजर आता है, तभी शेयर में भरोसे की वापसी होगी। सुला वाइनयार्ड्स में डाउनसाइड सीमित दिखता है, लेकिन मजबूत अपसाइड के लिए ग्रोथ का लौटना बेहद जरूरी है—और वही फिलहाल सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।


(शेयर मंथन, 29 जनवरी 2026)

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