भारत का हेल्थकेयर सेक्टर अब केवल दवा बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रह गया है।
फार्मास्युटिकल्स के साथ हॉस्पिटल्स, डायग्नोस्टिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, मेडिकल टेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में भी विकास के अवसर दिखाई दे रहे हैं। HDFC Mutual Fund के अनुसार, घरेलू हेल्थकेयर डिमांड में बढ़ोतरी, हेल्थकेयर खर्च में वृद्धि और भारत की ग्लोबल फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग में महत्वपूर्ण भूमिका इस पूरे सेक्टर के लिए लंबी अवधि की संभावनाएं तैयार कर रही है।
इस बदलाव के पीछे कई बड़े ट्रेंड काम कर रहे हैं। भारत की आबादी में बुजुर्गों की हिस्सेदारी बढ़ रही है, लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की घटनाएं बढ़ रही हैं और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही इंश्योरेंस की पहुंच बढ़ने से भी हेल्थकेयर सेवाओं पर खर्च करने की क्षमता और मांग बढ़ सकती है। इसका फायदा केवल फार्मा कंपनियों को ही नहीं, बल्कि हॉस्पिटल, डायग्नोस्टिक्स और मेडिकल टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों को भी मिल सकता है।
इसी व्यापक अवसर को ध्यान में रखते हुए HDFC Pharma and Healthcare Fund फार्मा और हेल्थकेयर से जुड़े अलग-अलग कारोबारों में निवेश करता है। फंड 4 अक्टूबर 2023 को लॉन्च हुआ था और 31 जुलाई 2026 तक इसने शुरुआत से 30.19% CAGR दर्ज किया था। एक साल की अवधि में इसका रिटर्न 19.01% रहा। फंड का प्रबंधन निखिल माथुर करते हैं और HDFC AMC के मुताबिक इसमें रिसर्च आधारित बॉटम-अप रणनीति अपनाई जाती है, जिससे अलग-अलग मार्केट कैप और हेल्थकेयर इकोसिस्टम के विभिन्न हिस्सों में अवसर तलाशे जा सकें।
फिर भी इस तरह के सेक्टोरल फंड में जोखिम अधिक हो सकता है, क्योंकि इसका निवेश एक खास सेक्टर या थीम के आसपास केंद्रित रहता है। HDFC AMC ने भी स्पष्ट किया है कि सेक्टोरल/थीमैटिक प्रकृति के कारण यह diversified equity mutual funds की तुलना में ज्यादा sector-specific और concentration risk लेकर आता है। इसलिए मजबूत सेक्टर की कहानी के बावजूद निवेश का फैसला जोखिम क्षमता और निवेश के लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए।
(शेयर मंथन, 08 सितंबर 2026)