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धनिया में रुकावट, हल्दी की कीमतों में गिरावट की संभावना - एसएमसी

हल्दी वायदा (जुलाई) की कीमतों में 7,300-7,200 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है। हाजिर बाजार में सेंटीमेंट कमजोर है और बाजार में खराब क्वालिटी की आवक के बीच स्थानीय स्टॉकिस्टों की ओर से सुस्त माँग के कारण कीमतों में गिरावट हुई है।

मेंथा तेल में तेजी, कॉटन की कीमतों में बढ़त की उम्मीद - एसएमसी

अंतरराष्ट्रीय बाजार से सकारात्मक संकेत के कारण एमसीएक्स पर कॉटन वायदा (जून) की कीमतों में 24,500-24,600 रुपये तक बढ़त दर्ज की जा सकती है।

सोयाबीन की कीमतों में 6,900-7,200 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना - एसएमसी

सोयाबीन वायदा (जुलाई) की कीमतों के 6,900-7,200 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। मध्य प्रदेश में कई सोयाबीन किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा प्रदान किये गये प्रमाणित बीजों की कमी के कारण सीजन शुरू होने के दो महीने बाद भी खरीफ फसल की बुवाई 60% क्षेत्र में शुरू नहीं हुई है।

हल्दी और धनिया की कीमतों में बाधा रहने की संभावना - एसएमसी

हल्दी वायदा (जुलाई) की कीमतों को 7,700 रुपये के स्तर पर अड़चन रहने की संभावना है और शॉर्ट कवरिंग पर रोक लगी रह सकती है।

सोयामील में गिरावट, सोयाबीन और आरएम सीड की कीमतों में बढ़त की उम्मीद - एसएमसी

सोयाबीन वायदा (जुलाई) की कीमतों में 7,100-7,200 रुपये तक बढ़ोतरी दर्ज करने की संभावना है। मध्य प्रदेश में कई सोयाबीन किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा प्रदान किये गये प्रमाणित बीजों की कमी के कारण सीजन शुरू होने के दो महीने बाद भी खरीफ फसल की बुवाई 60% क्षेत्र में शुरू नहीं हुई है।

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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