सोने की मौजूदा चाल को लेकर बाजार में उत्सुकता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों को देखें तो हाल की तेज गिरावट के बाद सोने में एक मजबूत रिवर्सल देखने को मिला है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि तकनीकी तौर पर यह गिरावट 61.8% फिबोनाची रिट्रेसमेंट से भी ज्यादा नीचे चली गई थी, लेकिन वहां से संभलते हुए कीमतें अब 23.6% रिट्रेसमेंट के ऊपर क्लोजिंग देने लगी हैं। यह संकेत देता है कि निकट अवधि में रिकवरी की गुंजाइश बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि 5400-5500 डॉलर (अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में) की रेंज तक सोना दोबारा जा सकता है। हालांकि, इसके आगे नई तेज चाल तभी संभव है जब कोई बड़ा जियोपॉलिटिकल ट्रिगर सामने आए।
सोना पारंपरिक रूप से दो प्रमुख कारणों से मजबूत होता है, महंगाई (इन्फ्लेशन) और भू-राजनीतिक तनाव। केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी भी इसे मजबूत आधार देती है। यदि मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ता है या ईरान जैसे मुद्दों पर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है, तो सोने में एक दिन में ही तेज उछाल देखने को मिल सकता है। फिलहाल चार्ट स्ट्रक्चर में हायर लो और हायर हाई का पैटर्न बन रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि गिरावट का एक चरण पूरा हो चुका है और अब कुछ समय कंसोलिडेशन रह सकता है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो पिछला उच्च स्तर छूने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
चांदी की बात करें तो उसकी चाल सोने जितनी मजबूत नहीं दिख रही है। हाल की गिरावट के बाद चांदी में भी रिवर्सल आया है और 97–98 डॉलर की दिशा में उछाल संभव बताया जा रहा है, लेकिन अभी यह उतना मजबूत उम्मीदवार नहीं माना जा रहा जितना सोना। चांदी में वोलैटिलिटी अधिक है और जोखिम भी अपेक्षाकृत ज्यादा है। तकनीकी रूप से यदि यह 280-282 के स्तर के ऊपर टिकती है तो आगे बड़ी चाल बन सकती है, लेकिन फिलहाल स्पष्टता कम है।
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि डॉलर और रुपये के भाव में रिटर्न का अंतर दिखाई देता है। घरेलू बाजार में कॉस्ट ऑफ कैरी और मुद्रा विनिमय दर के कारण 4-7% तक का अंतर आ सकता है। इसलिए निवेशकों को यह समझना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू रिटर्न में कुछ भिन्नता स्वाभाविक है।
सोने में फिलहाल सीमित जोखिम के साथ कंसोलिडेशन का दौर दिख रहा है और 5400–5500 की रेंज तक उछाल संभव है। वहीं चांदी में थोड़ा अधिक सतर्क रहना उचित होगा। आगे की बड़ी चाल पूरी तरह वैश्विक आर्थिक संकेतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
(शेयर मंथन, 02 मार्च 2026)
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