कॉटन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के 17,400-17,800 रुपये के दायरे में स्थिर कारोबार करने की संभावना है।
कॉटन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में 17,600-17,500 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है।
कॉटन वायदा (अक्टूबर) बहुत अधिक खरीदारी वाले दायरे में है और यदि कीमतें 18,000 रुपये के स्तर के पास बाधा स्तर को पार नहीं कर पाती है तो हम 17,800-17,700 रुपये की ओर कुछ सुधर रुपये तक गिरावट देख सकते हैं।
कॉटन वायदा (अक्टूबर) बहुत अधिक खरीदारी वाले दायरे में है और यदि कीमतें 18,000 रुपये के स्तर के पास अड़चन स्तर को पार नहीं कर पाती है तो हम 17,800-17,700 की ओर कुछ सुधर रुपये तक गिरावट देख सकते हैं।
कॉटन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में 17,300-17,200 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है जबकि कीमतों को 17,900 रुपये के पास बाधा का सामना करना पड़ सकता है।
कॉटन वायदा (अप्रैल) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ 21,200-21,400 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
कॉटन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के 17,800-18,000 रुपये के दायरे में स्थिर कारोबार करने की संभावना है।
कॉटन वायदा (अक्टूबर) कीमतें 17,900-18,100 रुपये के दायरे में सीमित कारोबार कर सकती है।
कॉटन वायदा (अप्रैल) की कीमतें 22,050-23,000 के दायरे में कारोबार कर सकती है।
कॉटन वायदा वायदा (फरवरी) की कीमतों के 21,500 रुपये से नीचे ही रहने की संभावना है और 20,600-20,400 रुपये के स्तर तक गिरावट हो सकती है।
कॉटन वायदा (फरवरी) की कीमतों के 21,400-21,600 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं।
कॉटन ऑयल सीड केक वायदा (फरवरी) की कीमतों के 1,670-1,710 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
कॉटन वायदा (दिसंबर) की कीमतों के 19,800-20,200 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं।
कपास वायदा (अप्रैल) की कीमतों के 980-1005 रुपये के दायरे में साइडवेज कारोबार करने की संभावना है।
कॉटन वायदा (नवम्बर) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 19,600-19,900 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
एमसीएक्स पर कॉटन वायदा (जून) की कीमतों में तेजी का रुझान है और कीमतें 23,300-23,350 रुपये के उच्च स्तर पर पहुँच सकती हैं।
एमसीएक्स पर कॉटन वायदा (जून) की कीमतों के 22,600-22,800 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं।
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हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।
भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग ने बीते 5 वर्षों में अद्भुत वृद्धि दिखायी है। इसके साथ ही, इस तेजी से फैलते उद्योग का हिस्सा बनने के लिए एक दर्जन से ज्यादा नये म्यूचुअल फंड घराने मैदान में कूद चुके हैं।