पुखराज बोथरा और शुभम बेरा दोनों जानना चाहते हैं कि उन्हें सिप्ला (Cipla) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि सिप्ला के लिए करीब 1270-1280 रुपये का जोन पहले एक अहम ब्रेकआउट एरिया था और अब शेयर दोबारा उसी स्तर के आसपास लौट आया है। आमतौर पर ऐसे लेवल पर स्टॉक में कंसोलिडेशन देखने को मिलता है और यहीं से अगली दिशा तय होती है।
वैल्यूएशन के नजरिए से देखा जाए तो सिप्ला फिलहाल करीब 22-23 गुना के दायरे में ट्रेड कर रहा है, जो इसके ऐतिहासिक स्तरों की तुलना में ज्यादा महंगा नहीं कहा जा सकता। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि स्टॉक में काफी हद तक नेगेटिव बातें कीमत में शामिल हो चुकी हैं। अगर बाजार का समग्र माहौल संभलता है और निफ्टी अपने 24,900 के आसपास बने डबल बॉटम को बनाए रखता है, तो सिप्ला के लिए 1280 के आसपास का स्तर एक मजबूत बॉटम बन सकता है। ऐसी स्थिति में शॉर्ट कवरिंग के चलते 1400 रुपये या उससे ऊपर तक की रिकवरी देखने को मिल सकती है।
हालांकि, हालिया नतीजे पूरी तरह से भरोसा दिलाने वाले नहीं रहे हैं। कंपनी की सेल्स ग्रोथ फ्लैट रही, मार्जिन करीब 25% से घटकर 18% के आसपास आ गया और मुनाफे में भी तेज गिरावट देखने को मिली। यह कमजोर प्रदर्शन निवेशकों के सेंटिमेंट पर दबाव डालता है। इसके अलावा 7 तारीख को शेयर में जो तेज गिरावट आई थी, उसका कारण यूएस एफडीए की एक ऑब्जरवेशन रही, जो सीधे सिप्ला पर नहीं बल्कि उसकी एक थर्ड-पार्टी मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर कंपनी ग्रीस स्थित फार्माथेन इंटरनेशनल से जुड़ी थी। यह दवा कंपनियों में एक इनहेरेंट रिस्क है, जो चाहे कंपनी कितनी ही अच्छी क्यों न हो, हमेशा बना रहता है।
फार्मा सेक्टर में ऐसे रेगुलेटरी रिस्क को मैनेज करने का सबसे बेहतर तरीका यही माना जाता है कि निवेश तब किया जाए जब वैल्यूएशन नॉर्मल या उससे नीचे हो। ऊंचे वैल्यूएशन पर ऐसे “ब्लैक स्वान” टाइप इवेंट्स का असर ज्यादा दर्दनाक होता है। सिप्ला के मामले में सितंबर–अक्टूबर के दौरान जब स्टॉक 30-35 गुना के वैल्यूएशन पर था, तब यह जोखिम ज्यादा था। अब वैल्यूएशन नॉर्मल रेंज में आ चुका है, इसलिए माना जा सकता है कि यूएस एफडीए से जुड़ा बड़ा जोखिम काफी हद तक कीमत में समाहित हो चुका है।
मौजूदा स्तरों पर सिप्ला में तुरंत आक्रामक खरीदारी करने की बजाय थोड़ा इंतजार करना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है। अगर बाजार का सेंटिमेंट सुधरता है और 1270-1280 का स्तर कायम रहता है, तो धीरे-धीरे पोजिशन बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। लेकिन अगर निफ्टी का सपोर्ट टूटता है और बाजार में नई कमजोरी आती है, तो सिप्ला में भी नीचे की ओर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में फिलहाल धैर्य और चरणबद्ध रणनीति ही बेहतर मानी जाएगी।
(शेयर मंथन, 30 जनवरी 2026)
(आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)