शेयर मंथन में खोजें

एलएंडटी (L&T), आईसीआईसीआई (ICICI) ने चढ़ाया सेंसेक्स (Sensex) को

आज सेंसेक्स (Sensex) की बढ़त में सबसे ज्यादा योगदान लार्सन एंड टुब्रो (Larsen & Toubro), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और इन्फोसिस (Infosys) का रहा।

सेंसेक्स को लार्सन एंड टुब्रो से 71 अंक, आईसीआईसीआई बैंक से 44 अंक और इन्फोसिस से 39 अंक की बढ़त हासिल हुई। इसके एसबीआई ने 38 अंक और एचडीएफसी ने भी 34 अंक का योगदान किया। सेंसेक्स के कुल 29 शेयर आज फायदे में रहे, जबकि केवल 1 शेयर लाल निशान में रहा। इसे डीएलएफ ने 1 अंक की चपत लगायी। सेंसेक्स के इन शेयरों का अपना नफा-नुकसान देखें, तो सबसे ज्यादा फायदे में जयप्रकाश एसोसिएट्स का शेयर रहा। यह 5.55 रुपये यानी 6.79% की तेजी के साथ 87.30 रुपये पर आ गया। लार्सन एंड टुब्रो को 6.70%, टाटा मोटर्स को 5.60%, बीएचईएल को 4.56%, जिंदल स्टील को 4.44%, एसबीआई को 4.12%, टाटा स्टील को 4.06%, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज को 3.88%, हीरो होंडा को 3.79%, टाटा पावर को 3.74%, एचडीएफसी को 3.29%, बजाज ऑटो को 3.12%, मारुति सुजुकी को 3.06%, आईसीआईसीआई बैंक को 3.06%, भारती एयरटेल को 2.43%, एचडीएफसी बैंक को 2.28%, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को 2.27%, टीसीएस को 2.22% और इन्फोसिस को 2.10% का फायदा हुआ। रिलायंस इन्फ्रा में 1.85%, महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1.71%, हिंदुस्तान यूनिलीवर में 1.64%, आईटीसी में 1.58% और एनटीपीसी में 1.05% की तेजी रही। ओएनजीसी में 0.74%, विप्रो में 0.58%, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 0.51%, रिलायंस कम्युनिकेशंस में 0.26% और सिप्ला में 0.16% की मजबूती रही। दूसरी ओर, डीएलएफ को 0.38% का घाटा सहना पड़ा। (शेयर मंथन, 14 फरवरी 2011)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख