शेयर मंथन में खोजें

गुरुवार को तीखे उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स (Sensex) 81 अंक नीचे बंद

आज गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने खराब वैश्विक संकेतों के बीच कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ की। मगर इसके बाद यह निचले स्तरों से काफी सँभला और दोपहर तक हरे निशान में ठीक-ठाक बढ़त पर आ गया।

अंतिम घंटे में यह फिर से लाल निशान में लौट आया और हल्की गिरावट पर बंद हुआ। बीएसई का सेंसेक्स (Sensex) पिछले बंद स्तर 24,854.11 की तुलना में 24,606.20 पर खुला और नीचे 24,473.22 तक फिसला। इसके बाद यह लगातार सँभलता गया और दोपहर में हरे निशान में भी आ गया। इस दौरान यह 25,018.46 तक चढ़ा, मगर वहाँ से यह फिर लाल निशान में लौट गया। इसका दिन भर का उतार-चढ़ाव 545 अंकों का रहा। अंत में यह 81.14 अंक या 0.33% की गिरावट दर्ज करते हुए 24,772.97 पर बंद हुआ।
एनएसई का निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 25.60 अंक या 0.34% की कमजोरी के साथ 7,536.80 पर बंद हुआ। सुबह के कारोबार में यह 7,443.80 तक गिरा, जबकि इसका आज का ऊपरी स्तर 7,604.80 रहा।
सेंसेक्स के 30 में से 21 शेयर लाल निशान में रहे, जबकि निफ्टी 50 के 50 में से 31 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स के दिग्गज शेयरों में ऐक्सिस बैंक (-3.90%), टाटा स्टील (-3.36%), बीएचईएल (-2.81%), टाटा मोटर्स (-2.63%), एसबीआई (-2.56%) और एलऐंडटी (-1.98%) सबसे ज्यादा नुकसान पर रहे। दूसरी ओर इन्फोसिस (4.28%), ल्युपिन (3.02%), एशियन पेंट्स (2.39%), सिप्ला (0.85%), डॉ. रेड्डीज (0.84%) और ओएनजीसी (0.83%) हरे निशान में बंद हुए।
छोटे-मँझोले शेयरों के सूचकांक भी कमजोर रहे। बीएसई मिडकैप में 1.00% और बीएसई स्मॉलकैप में 1.27% की कमजोरी रही। एनएसई में निफ्टी मिडकैप 100 में 1.20% और निफ्टी स्मॉल 100 में 1.15% की गिरावट दर्ज हुई। (शेयर मंथन, 14 जनवरी 2016)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख