शेयर मंथन में खोजें

सेंसेक्स (Sensex) 83 अंक चढ़ा, निफ्टी (Nifty) 7850 के पार

मंगलवार को गिरावट के साथ खुलने के बाद अंत में भारतीय शेयर बाजार हरे निशान पर बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स (Sensex) 83.67 अंक (0.33%) की बढ़त के साथ 25,772.53 पर बंद हुआ।

इसका दिन का ऊपरी स्तर 25,809.93 का रहा, जबकि नीचे की ओर यह 25,614.24 तक फिसला। एनएसई का निफ्टी 50 (Nifty 50) 21.75 अंक (0.28%) की तेजी के साथ 7,887.80 पर बंद हुआ। सत्र के मध्य में यह 7,896.90 तक ऊपर चढ़ा। दूसरी ओर इसका दिन का निचला स्तर 7,837.70 रहा। इंडिया वीआईएक्स (VIX) सूचकांक 1.19% की गिरावट के साथ 16.4150 पर बंद हुआ। आज कैपिटल गुड्स, फार्मा, बैंकिंग, एफएमसीजी और आईटी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। हालाँकि मेटल, ऑटो, ऑयल और गैस और पावर शेयरों में बिकवाली देखने को मिली है।
छोटे-मॅंझोले शेयरों में मिला-जुला रुझान रहा । बीएसई मिडकैप में 0.20% की और बीएसई स्मॉल कैप में 0.11% की मजबूती आयी। वहीं निफ्टी मिड 100 0.28% की गिर कर बंद हुआ जबकि निफ्टी स्मॉल 100 0.09% की बढ़त आयी।
आज के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स के दिग्गज शेयरों में डॉ.रेड्डीज में 3.04%, ऐक्सिस बैंक में 2.22%, हिंदुस्तान यूनिलीवर में 1.93%, एलटी में 1.87%, गेल में 1.26% और एचडीएफसी में 1.20% की तेजी रही। दूसरी ओर गिरने वाले शेयरों की बात करें तो टाटा मोटर्स में 3.58%, एनटीपीसी में 1.75%, ओएनजीसी में 1.65%, अदाणी पोर्ट्स में 0.99%,एशियन पेंट्स में 0.83% और आईटीसी में 0.45% की गिरावट आयी। निफ्टी 50 के 26 शेयर हरे निशान पर रहे और 23 शेयर लाल निशान पर बंद हुए। (शेयर मंथन, 10 मई 2016)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख