शेयर मंथन में खोजें

आमदनी बढ़ने के बावजूद घटा बजाज ऑटो (Bajaj Auto) का मुनाफा

साल दर साल आधार पर 2019 की अप्रैल-जून तिमाही में बजाज ऑटो (Bajaj Auto) के मुनाफे में 2.84% की गिरावट आयी है।

2018 की इसी तिमाही में 1,041.78 करोड़ रुपये के मुकाबले कंपनी ने 1,012.17 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया। इस दौरान कंपनी की शुद्ध आमदनी 7,464.89 करोड़ रुपये की तुलना में 3.9% अधिक 7,755.8 करोड़ रुपये रही।
वहीं बजाज ऑटो का एबिटा 10.5% की गिरावट के साथ 1,198.2 करोड़ रुपये, एबिटा मार्जिन 249 आधार अंक घट कर 15.4% और ऑपरेटिंग मुनाफा 8% की गिरावट के साथ 1,189 करोड़ रुपये रह गया।
बजाज ऑटो की वाहन बिक्री में भी कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई। साल दर साल आधार पर कंपनी की अप्रैल-जून बिक्री 12,26,641 इकाई के मुकाबले 2% बढ़ कर 12,47,174 रही। इनमें मोटरसाइकिल बिक्री 594,234 इकाई से 3% अधिक 610,936 इकाई रही, जबकि कारोबारी वाहनों का योगदान 9% घट कर 86,217 इकाई रह गया।
बजाज ऑटो की कुल घरेलू बिक्री 6,88,665 इकाई से 1% अधिक 697,153 इकाई रहा, जबकि निर्यात 2% की बढ़ोतरी के साथ 5,50,021 इकाई रहा।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के मुताबिक बजाज ऑटो की आमदनी संतुलित रही, मगर मार्जिन अनुमान से थोड़े कमजोर रहे।
दूसरी तरफ बीएसई में बजाज फाइनेंस का शेयर 2,545.15 रुपये के पिछले बंद स्तर की तुलना में सुबह मामूली गिरावट के साथ 2,540.10 रुपये पर खुला। अभी तक के कारोबार में यह 2,679.50 रुपये के ऊपरी स्तर तक चढ़ा है।
करीब ढाई बजे कंपनी के शेयरों में 79.45 रुपये या 3.12% की बढ़ोतरी के साथ 2,624.60 रुपये पर सौदे हो रहे हैं। इस भाव पर कंपनी की बाजार पूँजी 75,958.84 करोड़ रुपये है। वहीं इसके पिछले 52 हफ्तों का शिखर 3,145.55 रुपये और निचला स्तर 2,425.00 रुपये रहा है। (शेयर मंथन, 26 जुलाई 2019)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख