शेयर मंथन में खोजें

गुजरात गैस (Gujarat Gas) के शुद्ध लाभ में 91.6% की बढ़ोतरी

वित्त वर्ष 2018-19 की अप्रैल-जून तिमाही के मुकाबाले चालू वित्त वर्ष की समान अवधि में गुजरात गैस (Gujarat Gas) का मुनाफा 91.6% अधिक रहा।

गुजरात गैस का मुनाफा 122.1 करोड़ रुपये से बढ़ कर 234 करोड़ रुपये हो गया। साथ ही इसकी शुद्ध आमदनी 1,814 करोड़ रुपये के मुकाबले 47% अधिक 2,671 करोड़ रुपये रही। तिमाही दर तिमाही आधार पर देखें तो कंपनी के मुनाफे में 100% और आमदनी में 36% की बढ़ोतरी दर्ज की गयी, जबकि कंपनी का एबिटा 83.6% की बढ़ोतरी के साथ 466.5 करोड़ रुपये और एबिटा मार्जिन 450 आधार अंक उछल कर 17.8% हो गया।
साल दर साल आधार पर गुजरात गैस की औद्योगिक बिक्री 57% अधिक 644 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (एमएमसीएम) रही, जो पिछली तिमाही के मुकाबले भी 24% अधिक है।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के मुताबिक मुख्य रूप से मात्रा में 42% की बढ़ोतरी के सहारे कंपनी के नतीजे अनुमान से अधिक रहे।
उधर बीएसई में गुजरात गैस का शेयर 163.60 रुपये के पिछले बंद स्तर के मुकाबले सुबह मजबूती के साथ 183.00 रुपये पर खुल कर अभी तक के सत्र में 192.40 रुपये तक चढ़ा है। करीब 12 बजे कंपनी के शेयरों में 10.30 रुपये या 6.30% की मजबूती के साथ 173.90 रुपये पर सौदे हो रहे हैं। इस भाव पर कंपनी की बाजार पूँजी 11,971.10 करोड़ रुपये है। वहीं इसके पिछले 52 हफ्तों का शिखर 195.00 रुपये और निचला स्तर 116.00 रुपये रहा है। (शेयर मंथन, 31 जुलाई 2019)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख