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लंबी अवधि के निवेशकों के लिए विक्रम सोलर शेयरों में निवेश कैसा रहेगा?

शुभम कुमार जानना चाहते हैं कि उन्हें विक्रम सोलर (Vikram Solar) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि विक्रम सोलर का आईपीओ अगस्त में आया था और शुरुआत में इसका मूल्यांकन काफी ऊँचे प्रीमियम पर हुआ। लिस्टिंग के बाद स्टॉक ने पहले तेजी दिखाई, लेकिन उसके बाद इसमें तेज करेक्शन भी आया। अगर सरल भाषा में कहा जाए, तो शुरुआती वैल्यूएशन बहुत ज्यादा एक्सपेंसिव था, इसलिए वहां से गिरावट आना स्वाभाविक था। अब सवाल यह है कि मौजूदा स्तरों पर, करीब 30 गुना के वैल्यूएशन पर, यह गिरावट क्यों बनी हुई है। इसका सीधा जवाब यही है कि कंपनी के पास अभी लिस्टिंग के बाद का पर्याप्त ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है, जिससे बाजार पूरी तरह आश्वस्त हो सके। 

यहां निवेशकों को खास तौर पर क्वार्टरली रिजल्ट्स पर ध्यान देना चाहिए। आईपीओ से पहले के आंकड़े और आईपीओ के बाद के आंकड़ों की तुलना जरूरी है। जून तिमाही (आईपीओ से पहले) और सितंबर तिमाही (आईपीओ के बाद) के नंबर्स देखने पर यह साफ दिखता है कि जिस तरह की तेज ग्रोथ की कहानी बाजार में बेची गई थी, वह क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर आधार पर उतनी मजबूत नजर नहीं आती। इसी वजह से बाजार में एक तरह का संदेह पैदा हुआ है। मौजूदा वैल्यूएशन को देखें तो अगर कंपनी आने वाले समय में 25-30% की ग्रोथ भी बनाए रख पाती है, तो 30 गुना का वैल्यूएशन बहुत ज्यादा महंगा नहीं कहा जाएगा, खासकर एक इमर्जिंग सेक्टर में। असली सवाल यही है कि क्या यह ग्रोथ वास्तव में सस्टेन हो पाएगी। इसका जवाब हमें अगले एक-दो क्वार्टर के नतीजों से ही मिलेगा। 

प्राइस एक्शन की बात करें तो निवेशकों के लिए दो चीजें अहम हैं। पहली, कम से कम एक ताजा क्वार्टरली रिजल्ट का इंतजार किया जाए और देखा जाए कि नंबर्स में सुधार आता है या नहीं। दूसरी, टेक्निकल रूप से अगर स्टॉक 255 के ऊपर क्लोज होकर वहां सस्टेन करता है, तो यह संकेत हो सकता है कि 225 के आसपास एक मजबूत बॉटम बन चुका है। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक जल्दबाजी में निर्णय लेना जोखिम भरा हो सकता है।


(शेयर मंथन, 05 जनवरी 2026)

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